हिन्दुओं की अज्ञानता

वर्तमान में हिन्दू समाज ने सबसे ज्यादा प्रगति अज्ञानता और अन्धविश्वास के रूप में की हैं। एक समय मंदिरों में इतना धन इक्कट्ठा कर दिया गया कि कोई भी मुस्लिम आक्रान्ता हमला करके तिनके के समान की रक्षा पंक्ति को… Continue Reading

भारत माता की जय

शायद ही दुनिया में ऐसा कोई देश हो जिसके स्वाधीनता के सत्तर साल पश्चात् देश की जय-जयकार के सामने सवालिया निशान लगता हो. शायद ही दुनिया में ऐसा कोई देश हो जिसमें स्वाधीनता संग्राम के मंत्र स्वरूप वंदे मातरम् की… Continue Reading

गुरु पूर्णिमा – गुरु के प्रति आभार का दिन

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरु साक्षात् परम्ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम: ।। भारतीय संस्कृति में अनादिकाल से ही गुरु को विशेष दर्जा प्राप्त है. यहां गुरु-शिष्य परंपरा सदियों पुरानी है. हमारे यहां गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान… Continue Reading

गुरु पूर्णिमा और संघ

अपने राष्ट्र और समाज जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है. व्यास महर्षि आदिगुरु हैं. उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा. विचार तथा आचार का… Continue Reading

कर्म करने की प्रेरणा देती है भगवद्गीता

(21 दिसंबर, गीता जयन्ती पर विशेष) “जब शंकाएं मुझ पर हावी होती हैं, और निराशाएं मुझे घूरती हैं, जब दिगंत में कोई आशा की किरण मुझे नजर नहीं आती, तब मैं गीता की ओर देखता हूं.” – महात्मा गांधी. संसार… Continue Reading

समस्याओं का हल साधनों में नहीं साधना में निहित है

विजयादशमी विजय का उत्सव मनाने का पर्व है. यह असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की, दुराचार पर सदाचार की, तमोगुण पर दैवीगुण की, दुष्टता पर सुष्टता की, भोग पर योग की, असुरत्व पर देवत्व की विजय का उत्सव… Continue Reading

भारत में ही सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं अल्पसंख्यक

क्या हिन्दुत्ववादी उग्रता का प्रचार अतिरेक अल्पसंख्यकों में उन्मादी अभिव्यक्ति का कारण बन रहा है. यह प्रश्न इसलिए किया जाने लगा है क्योंकि कतिपय चोरी या किसी आस्था के भवन पर पत्थरबाजी की घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस ढंग… Continue Reading

शिक्षा सुधार की हर कोशिश ‘भगवाकरण’ नहीं होती

भारत सरकार में 2009 में जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में दूसरा मंत्रिमंडल गठित हुआ, शिक्षा में गुणात्मक विकास और व्यापक विस्तार के लिए शिक्षा संस्था और विद्यार्थी का एक मानक निर्धारित किया। इस मानक के अनुसार जिन शिक्षा संस्थाओं… Continue Reading

उठो भारत ! अपनी आध्यात्मिक शक्ति से संपूर्ण विश्व पर विजय प्राप्त करो

‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत’ ये कहावत जितनी व्यक्ति पर लागू होती है, उतनी ही समाज पर भी लागू होती है. विजय की आकांक्षा व विजय की अनुभूति समाजमन को बल देते हैं. जब समूचा राष्ट्र… Continue Reading