असंख्य प्रश्नों के उत्तर थे रज्जू भैया

किसी कविता संग्रह का शीर्षक था- लिखना कि जैसे आग. सच है, संभवत: अधिकांश लेखन को किसी न किसी गुण, किसी न किसी तत्व-गुण, रस या स्वभाव के साथ चिन्हित किया जा सकता है. लेकिन हमारे रज्जू भैया को नहीं.… Continue Reading