विद्यार्थियों को समाज को देने की मनोवृत्ति विकसित करनी चाहिए : डॉ. मनमोहन

विसंके, रोहतक। भारत की अवधारणा अध्यात्म आधारित अवधारणा है। भारतीय दृष्टि में अध्यात्म और एकात्म का समावेश है। भारतीय संस्कारों में सामाजिक परोपकार समाहित हैं। भारत के युवा वर्ग को भारत को सही मायने में समझने की जरूरत है। भारत में भारत को बनाने की जरूरत है। ये विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने रोहतक विश्वविद्यालय में युवा एवं भारत विषय पर आयोजित सेमिनार को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।

डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि आज देश में वैचारिक संघर्ष चल रहा है। पिछले दिनों सहिष्णुता व असहिष्णुता पर बड़ी बहस चली। देश का प्रतिनिधित्व करने वालों को असहिष्णुता घोषित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है। भारत की सांस्कृतिक विविधता, विविधता में एकता, सांस्कृतिक विशिष्टता का पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं। रविन्द्र नाथ टैगौर ने भी लिखा है कि अनेकता में एकता का उदाहरण देखना है तो भारत में देखो। उन्होंने कहा कि धर्म ही जीवन का आधार है। क्योंकि धर्म जोड़ने की प्रेरणा देता है तोड़ने की नहीं। भारत की संस्कृति प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर को देखती है। उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में सार्थक विद्या की परंपरा सृजित करने की बात करते हुए कहा कि आज हमारे सामने जो परिस्थिति है वह शिक्षण संस्थान में मिल रही अविद्या के कारण है। हमें समाज से बहुत कुछ मिला है इसलिए हमें समाज को देने की मनोवृत्ति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन सफल नहीं सार्थक बनाने का संदेश दिया। कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पुनिया ने कहा कि युवा वर्ग को भारत के इतिहास एवं संस्कृति से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

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