हर विद्यार्थी को हो ललित कला का अभ्यास : मुख्यमंत्री

कुरुक्षेत्र, विसंके।  मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हर विद्यार्थी को ललित कला का अभ्यास होना चाहिए। इसके लिए देश-दुनिया की संस्कृति के आदान-प्रदान को लेकर राज्य सरकार ने एक योजना तैयार की है। इस योजना को भारतीय संस्कृति कला परिषद और हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक विभाग के जरिए अन्य देशों और प्रदेशों से संस्कृति के आदान-प्रदान को लेकर समझौता किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल श्रीमद्भागवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय कला साधक संगम के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कलाकारों से आह्वान करते हुए कहा कि कला संस्कृति की कोई भाषा और प्रदेश नहीं होता तथा कला, संगीत, नृत्य को केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। इसकी साधना करके अपने विचारों को शुद्ध करना चाहिए। कला साधना के माध्यम से ही अच्छे-बुरे की पहचान होती है। और उच्च श्रेणी के समाज में परिवर्तन लाने के लिए अभी भी शिक्षा जगत में ओर अधिक परिवर्तन लाने की जरूरत है। अच्छे साहित्य, संगीत और कला के बिना मनुष्य के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इसलिए जीवन को सफल बनाने के लिए कला और संस्कृति को आगे बढ़ाना होगा। इस कार्य को राज्य सरकार तवज्जो देकर पूरा कर रही हैं। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि कुरुक्षेत्र से गीता के संदेश को पूरी दुनिया में पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने गीता जयंती समारोह को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का स्वरुप देने का काम किया। इस महोत्सव का आयोजन स्वयं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 नवंबर को करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक भारत-श्रेष्ठ भारत योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए हरियाणा एक-हरियाणवी एक की नीति पर कार्य कर रही है। सरकार का ध्येय है कि हरियाणा देश की सभी प्रांतों में श्रेष्ठ प्रदेश के रूप में अपनी जगह बनाए। एमएमबी गीता माध्यमिक विद्यालय तीन दिनों से लघु भारत बना हुआ था। तीन दिन चला अखिल भारतीय कला साधक संगम सोमवार को संपन्न हो गया। देशभर से पांच हजार कला साधक अपनी-अपनी कला और संस्कृति से रूबरू कराकर सोमवार शाम से वापस लौटना शुरू हो गए। आखरी दिन सीएम मनोहरलाल, राज्यमंत्री कर्णदेव काम्बोज, फिल्म निर्देशक सुभाष घई, विधायक सुभाष सुधा, संस्कार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ- वासुदेव कामत, संरक्षक योगेन्द्र, फिल्म निर्देशक राजदत्त, चौतन्य, मधु कपूर ने कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। सीएम ने संस्कार भारती की वेबसाइट और सम्भवामि स्मारिका का विमोचन किया। इस दौरान सीएम के साथ अतिथियों ने एमएमबी स्कूल में हरियाणा सांस्कृतिक गैलरी का अवलोकन किया। जहां ठेठ हरियाणवी जीवन शैली ने हर किसी को मंत्रमुग्ध किया। प्रदर्शनी में कांसे के बड़े गिलास बर्तन देख कर सीएम ने भी चुटकी ली। बोले भाई ये तो बटेऊ वाला गिलास है। जिस पर वहां मौजूद हर कोई ठहाके लगाने से रोक नहीं पाए।

“अंतरराष्ट्रीय स्तर के कम से कम हों 100 स्कूल” : सुभाष घई

मशहूर फिल्म निर्माता सुभाष घई ने कहा कि देश में फिल्म उद्योग को मुकाम तक पहुंचाने और पूरी दुनिया में भारत का सिक्का जमाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के 100 स्कूल होने चाहिए। विदेशी लोग भारतीय कहानियों पर फिल्में बनाकर अपना नाम रोशन कर रहे हैं। भारतीय भी ऐसा कर सकते हैं। कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में विशेष प्रयास होने चाहिए। अमेरिका की तर्ज पर प्राइमरी शिक्षा से एक पीरियड हर स्कूल में कला और संस्कृति का होना चाहिए। इसके लिए कुरुक्षेत्र में पहल की जा सकती है। स्थानीय विधायक सुभाष सुधा से चर्चा करके इस योजना को अमलीजामा पहनाने का प्रयास करेंगे। उनका सपना हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को पूरी दुनिया जाने। इस पर फिल्म बनाना चाहते हैं। कहा कि राज्य सरकार द्वारा कुरुक्षेत्र को सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करने के प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा से उनका गहरा नाता रहा है। इसलिए यहां फिल्म और कला संस्कृति को बढ़ावा देना वे अपना फर्ज समझते हैं। पूर्व में दो बार ऐसे प्रयास भी किए। सरकार ने भी आमंत्रित किया तो उन्होंने पहले सन् 1995 दस एकड़ जगह ली, लेकिन वहां भी प्रयास सिरे नहीं चढ़े। बाद में पूर्व सीएम भूपेंद्र ने भी न्योता दिया। जिस पर सन् 2010 में उन्होंने बड़साल में 20 एकड़ जगह ली। इसकी चारदीवारी भी करवा कर काम शुरू किया, लेकिन बाद में संबंधित पंचायत की तरफ से पीएल डाल दी। केस हारने पर उत्तफ़ जमीन वापस करनी पड़ी। उन्हें जमीन मिलने का दुख नहीं है, लेकिन इसके चलते हरियाणा में फिल्म सिटी विकसित करने के प्रयासों को जरूर ठेस लगी। हालांकि वे अब भी प्रयासरत हैं। उनसे जितना बनेगा, वे करेंगे। कहा कि प्राचीन इतिहास और संस्कृति पर शोध करके ही नवीन भारत का उदय किया जा सकता है। आमजन को कला और संस्कृति के रंग में रंगना होगा। जब आम नागरिक कला और संस्कृति को केवल परीक्षाओं से जोड़कर देखेंगे तो कला और संस्कृति का विकास संभव नहीं होगा। इसके लिए पूरी आत्मियता, आध्यात्मिकता और कलात्मक शिक्षा का ज्ञान अर्जित करना होगा।
सुभाष घई ने कहा कि भारतीय संस्कृति समृद्धता से भरी हुई है, मगर उसको सही रूप से पेश नहीं किया जा रहा है। विदेशी सिनेमाकार भारतीय इतिहास एवं कहानियों को चुराकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर रहे हैं। इसका कारण हिंदुस्तान में फिल्मी प्रशिक्षण स्कूल न होना है। देश में मुंबई में व्हिसलिंग वूड अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, उनके द्वारा स्थापित तथा कोलकाता एवं पुणे सहित तीन फिल्मी स्कूल हैं, जबकि 100 से ज्यादा स्कूलों की आवश्यकता है, तभी भारतीय सिनेमा को नई पहचान मिलेगी और नए अभिनेता एवं कलाकार तैयार हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि केवल डांस करने और गाना गाने को ही संस्कृति या कला नहीं समझना चाहिए। इस विषय को समझने के लिए अपने मन की भावना को साथ जोड़ना होगा। इतना ही नहीं स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में कला और संस्कृति की शिक्षा देने के लिए भारत सरकार की तरफ से नई शिक्षा नीति भी तैयार की जा रही है।

 

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