स्वामी विवेकानंदजी जी नर सेवा को ही नारायण सेवा माना – विजय कायत

विश्व संवाद केंद्र , कुरुक्षेत्र . समर्थ युवा-समरस भारत अभियान का शुभारंभ  कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में दीप प्रज्वलन के साथ  हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीडीएलयू के कुलपति प्रो डॉ विजय कुमार कायत रहे एवम् मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा रहे।
स्वामी विवेकानंद की जयंती से आरम्भ हुए “समर्थ युवा-समरस भारत” अभियान के अंतर्गत 14 अप्रैल बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की जयंती तक प्रदेश  के  सभी    विश्वविद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीडीएलयू के कुलपति प्रो डॉ विजय कुमार कायत ने कहा कि स्वामी विवेकानंद और डॉ भीमराव अम्बेडकर के विचारों में बड़ी समानता है। दोनों ही समरस समाज और समता मूलक समाज की बात करते हैं। विवेकानंद ने सनातन पताका को लहराते हुए जहां गरीब की सेवा को ही नारायण की सेवा माना है वहीं डॉ अम्बेडकर ने समानता आधारित समाज व्यवस्था की बात की है। डॉ अम्बेडकर ने भी समाज के विकास हेतु 3 मूल मंत्र दिए और वहीं 3 मूल मंत्र विवेकानंद जी ने दिए। दोनों ही अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ थे। नि:संदेह भारत भूमि पर जब-जब ऐसी विपदाएं आई तो विवेकानंद और डॉ अम्बेडकर जैसे महापुरूषों ने इस देश का मार्गदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार धर्म में ज्यादा निहित हैं। उनके धर्म में सामाजिक समरसता है। उन्होंने आज के युवा दिवस पर युवाओं का आह्ववान किया कि अगर वे वास्तव में सामाजिक परिवर्तन लाना चाहतें हैं तो विवेकानंद के विचारों और दर्शन को समझना होगा, तभी भारत परम वैभव की ओर आगे बढ़ सकता है।
सामाजिक समरसता के प्रान्त संयोजक पवन आहूजा, सह संयोजक मंजुल पालीवाल, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष प्रो. दयासिंह, डॉ प्रीतम सिंह, सेवा भारती के प्रांतीय मंत्री नरेश कुमार, कार्यक्रम संयोजक डॉ दिनेश राणा, डॉ बंसीलाल, कुटा प्रधान डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. आरके सूदन, प्रो. निर्मला चौधरी, प्रो. रंजना अग्रवाल, डॉ राजकमल, डॉ. वंदना, डॉ जितेन्द्र, डॉ रजनी, डॉ निरूपमा भट्टी, डॉ मनोज कुमार पेहवा सहित 150 की संख्या में शिक्षकों विद्यार्थियों आदि ने सहभागिता की।

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