स्कूलों की तर्ज पर गांव-दर-गांव खुलेंगे संस्कार केंद्र

सेवाभारती संस्था ने मटौर गांव से की पहल

कलायत, विसकें। शिक्षा और संस्कारों की राहे अब जुदा-जुदा नहीं होंगी। देश के भविष्य को संस्कारों का पाठ पढ़ाते हुए राष्ट्र का प्रहरी बनाने की मुहिम मटोर गांव से शुरू की गई है। इस लक्ष्य को लेकर गांव में बाल संस्कार केंद्र स्थापित किया गया। इसकी शुरुआत हवन के माध्यम से सेवा भारती कलायत के तत्वाधान में संस्था अध्यक्ष डाॅ. विनोद कुमार की अध्यक्षता में की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर सरपंच पिरथी चंद व विशिष्ट अतिथि के तौर पर शास्त्री जगत राम ने मौजूद रहे।

उन्होंने कहा कि भारत देश समृद्ध संस्कृति के बूते पर विश्व का सिरमौर रहा है। इस पहचान को कायम रखने के लिए फिर से बच्चों में संस्कार पैदा करने की जरूरत महसूस की जा रही है। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर युवा पीढ़ी कहीं-कहीं संस्कारों को भूल रही है। इसके चलते केवल पारिवारिक बल्कि सामाजिक जीवन में भी मतभेदों की खाई दिन-प्रतिदिन गहरी होती जा रही है। वे मानते है कि शिक्षा से बड़ा कोई धन नहीं है। लेकिन बगैर संस्कार हर तालीम अधूरी है। वक्त का यह तकाजा है कि शिक्षा को केवल रोजगार का जरिया मानकर विद्यार्थियों में संस्कारों के गुण भरने की जरूरत है। आदर्श समाज का जब-जब निर्माण हुआ है तब-तब कदम-कदम पर उन्नति की धारा फूटी है। साधु राम के साथ-साथ संस्था कार्यकारिणी सदस्य मुकेश कुमार, गौरव जिंदल, राजपाल सहारण, राजेश कुमार सुशील कांसल ने अपने वक्तव्य में संस्कारों को जीवन का आधार करार दिया। खजांची शर्मा, सुरेश प्रजापत, मास्टर कुलदीप, ईश्वर, सज्जन ग्रामीण आंचल राष्ट्र की पहचान है।

मटौर गाँव में केंद्र का शुभारम्भ करते पदाधिकारी

editor1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *