संघ की स्थापना का मुख्य उददेश्य सोई हुई चेतना को जगाना : विजय कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कैथल में संघ शक्ति संगम का आयोजन

जाति, वर्ग, भाषा के बंधन को तोड़ देश एवं समाज के लिए संगठित होकर कार्य करें स्वयंसेवक

विसंके, कैथल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कैथल द्वारा हिन्दू महिला महाविधालय में संघ शक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के तौर पर प्रान्त प्रचारक विजय कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम में पहुँचने पर सभी स्वयंसेवकों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का प्रबंधन एवं संचालन पूर्णतया अनुशासन के साथ किया गया एवं संघ शक्ति संगम की छटा देखते ही बनती थी। घोष, बैंड विभाग के स्वयंसेवकों द्वारा देशभक्ति गीतों की मनोहर धुन राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत वातावरण का निर्माण कर रही थी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रीतम सिंह विभाग कार्यवाह, राजेश सर्राफ जिला संघ चालक, प्रीतम जिला कार्यवाह उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर एक पूजा स्थल का निर्माण किया गया जहाँ शक्ति प्रतीक माँ दुर्गा, भारत माता की स्थापना की गयी थी जिसमें उपस्थित हर स्वयंसेवक ने पुष्प अर्पित किये एवं देश व समाज की उन्नति और एकता के लिए प्रार्थना की।

प्रान्त प्रचारक विजय कुमार ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि

कार्यक्रम को सम्बोधित करते प्रान्त प्रचारक विजय कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना परमपूजनीय डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा विजयादशमी के पावन अवसर पर वर्ष 1925 को नागपुर में की गई। संघ की स्थापना का मुख्य उददेश्य देश की सोई हुई चेतना को जगाना, सांस्कृतिक एवं सामाजिक मूल्यों का निर्माण, देश में एकता व अखंडता की भावना जगाना था। इस संगठन को डॉ. हेडगेवार के बाद श्री माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर पूजनीय गुरु जी, मधुकर दत्तात्रेय जी, देवरस, रज्जू भैया, प्रो. राजेंदर कुमार, सुदर्शन जी व वर्तमान में मोहन जी भागवत का पुण्य मार्गदर्शन मिल रहा है। आज संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवक संगठन है जो देश की संस्कृति, एकता एवं अखंडता को अक्षुण बनाये रखने के साथ-साथ भारत को जगतगुरु बनाने की लिए कटिबद्ध है। संघ भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञानए बौधिक सम्पदा के संवर्धन द्वारा

कार्यक्रम में मौजूद स्वयंसेवक

इस दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि आज समय की यही पुकार है की जाति, वर्ग, भाषा के बंधन को तोड़ते हुए हम सभी देश एवं समाज के लिए संगठित होकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी का लक्ष्य होना चाहिए कि देश मेरा, मैं देश के लिए। संघ की देश के लिए परिकल्पना एक जीते जागते राष्ट्र की है जिसे हम भारत माता के नाम से जानते हैं और हमारे द्वारा किये जाना वाला हर कार्य इस अनुभूति के साथ होना चाहिए कि मैं जो भी करूँ वह मेरी भारत माताए मेरे देश, मेरे समाज की लिए कर रहा हूँ। देश एवं समाज के लिए किये जाने वाला कार्य ईश्वरीय कार्य है और इसे करने में गर्व का अनुभव होना चाहिए। उन्होंने कहा की नवरात्री का पर्व शक्ति की उपासना का पर्व है। इस पर्व में हम निराहार रह कर भी शक्ति की उपासना करते हैं। हम शक्ति के उपासक हैं, हम अपने पुरुषार्थ में विश्वास रखते हैं।आज हमें मात्र अपने पुरुषार्थ को जगाना है और अपने कर्तव्य, विश्वास को जागृत करना है। जो संघ 1925 में नागपुर में शुरू हुआ, 1935 में हरियाणा की पुण्यभूमि एवं 1936 में कैथल में पहली शाखा लगी। आज समाज के लोग संघ के बारे में इन्टरनेट के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर रहें हैं व संगठन से जुड़ने के लिए ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से ऑन लाइन निवेदन भेज रहें हैं। इन निवेदनों की संख्या इतनी आधिक है कि आज संगठन को प्रत्येक जिले में ज्वाइन आरएसएस प्रमुख की संरचना करनी पड़ी ताकि इन निवेदनो को यथार्थ रूप दिया जा सके।
संघ के विभाग प्रचारक नरेंद्र कुमार ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हमारे सामने एक बहुत ही विकट चुनौती है, आज चीन जैसे देश अपने घटिया, निम्न स्तर के उत्पाद हमारे बाज़ार में उतार रहें है और हमारी अर्थव्यवस्था की नीव को कमजोर कर रहे हैं। बाहरी देश कम मूल्य पर अपने सामान को हमारे देश में बेच कर स्थानीय उद्योगों को हानि पहुंचा रहे है। इसके साथ हमारे देश से कमाए गए धन को हमारे ही देश के खिलाफ असामाजिक, आतंकी कार्यों के लिए इस्तेमाल करते है। हमारे तीज-त्यौहार जो की सामाजिक समरसता का प्रतीक थे, हमारे लघु. कुटीर उद्योग इन तीज-त्यौहार के मौके पर अपने उत्पाद बेच कर अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते थे। आज चाहे कोई भी त्यौहार हो जैसे कि रक्षा बंधन में राखी चीन में बनी हुई जिसके द्वारा एक तरफ तो हम अपने भाई की लम्बी उम्र की कामना करते हैं, वही दूसरी तरफ उसी पैसे से चीन आतंक को पोषित कर रहा है। चीन की लाइट एक तरफ तो हमारे घर को रोशन करती है, लेकिन उसी लाइट को खरीद कर हम अपने ही एक भाई के घर में अँधेरा कर देते हैं क्योंकि वो वर्ष भर दिवाली के इंतजार में दीपक बनाता है। परन्तु हम तो सस्ती लड़ी लगा कर खुश हैं। आज समय आ गया है कि हम स्वदेशी अपनाये, देश एवं समाज के सहयोग के लिए अपने लघु एवं कुटीर उद्योग द्वारा उत्पादित सामान का प्रयोग करें एवं नए रोजगार का सृजन करें। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी सामान का अधिकाधिक उपयोग हम सब भारतीयों का एक योगदान हो सकता है, भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने व भारत को विकासशील देश से विकसित राष्ट्र बनाने में। नरेंद्र ने स्वयंसेवकों का आह्वान किया कि हम स्वदेशी विचारधारा एवं आन्दोलन को समाज में लेकर के जाएँ एवं प्रत्येक भारतीय को इस अभियान से जोड़े व भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संबल प्रदान करें। इस कार्य को मूर्त रूप देने के लिए संघ 01 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक स्वदेशी पखवाडा आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम में कैथल जिले के 1000 से अधिक स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहे।कार्यक्रम में सभी आयुवर्ग के स्वयंसेवक उपस्थित थे।

 

 

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