श्रीमद्भगवद् गीता सुविधा व् क्षमता के बीच संतुलन का मार्ग दिखाती हैं – ज्ञानानंद जी महाराज

       img_7338img_7323
विश्व संवाद केंद्र .कुरुक्षेत्र, 6 दिसम्बर. गीता मनीषी पूज्य  स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भौतिकवाद के इस दौर में व्यक्ति के लिए सुविधाएं बढ़ी हैं लेकिन क्षमताएं कम हुई हैं। श्रीमद्भगवद् गीता जीवन में व्यक्ति को सुविधा व क्षमता के बीच संतुलन का मार्ग दिखाती है। जीवन में चरित्र निर्माण, आपसी सद्भावना, देश के बचपन को संस्कारवान व यौवन को विकृतियों से बचाने का रास्ता गीता है। गीता हमें संयम का बोध कराती है। गीता हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी है। गीता देश के युवाओं की उर्जा व बचपन का संस्कार है। उन्होंने कहा कि गीता कर्तव्यनिष्ठा व मानव कल्याण का रास्ता है। मानवता की भलाई व जीवन के कल्याण के लिए गीता को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से हम दुनिया के समक्ष श्रीमद्भगवद् गीता के संदेश को एक नए तरीके से रख सकेंगे।वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद् गीता सदन में 6 से 9 दिसम्बर को होने वाली भगवद् गीता सम्पूर्ण जीवन प्रबंधन और विश्व बंधुत्व एवं पर्यटन प्रेरणा विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बोल रहें थे.

इस मौके पर बोलते हुए मौलाना कोकब मुजतबा ने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता सम्पूर्ण मानव कल्याण के लिए एक पवित्र किताब है।  इस ग्रंथ का प्रत्येक शब्द मानवता की भलाई के लिए है। इंसानी जीवन की राहे हिदायत इस ग्रन्थ  में है। जीवन में सफलता के लिए इस ग्रंथ से हम जितना चाहे ले सकते हैं पर इसे लेने वालों में कमी है। उन्होंने कहा कि दुनिया में आपसी प्यार प्रेम व भाईचारे के लिए गीता को पढऩा जरूरी है। अगर गीता का उर्दू में अनुवाद किया जाए तो इस ग्रंंथ से करोड़ो लोगों को रोशनी मिलेगी।
हरियाणा के राज्यपाल एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्यातिथि प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि 21वीं सदी में दुनिया में मानव कल्याण व आपसी भाईचारे के लिए श्रीमद्भगवद् गीता को जीवन में अपनाने की जरूरत है। गीता हमें जीवन जीने की कला सीखाती है। जीवन को कैसे जिया जाए यह संदेश भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की इस कर्मभूमि में दिया था। विश्व की सभी समस्याओं के समाधान के लिए हमें गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
img_7400
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद् गीता सदन में इससे पूर्व हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री डॉ रामबिलास शर्मा, हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी, जीओ गीता के संस्थापक स्वामी ज्ञानानंद महाराज, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से इन्द्रेश कुमार, अमेरिका से आए प्रो. डेविड फराले, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा, भाई सतपाल जी महाराज, मौलाना कोकब मुजतबा, श्याम गुप्ता ने दीप प्रज्जवलित कर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर
राज्यपाल ने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता भारत की संस्कृति व उसकी आत्मा की पहचान को प्रकट करता है। गीता का ज्ञान हमारे अंत:करण में जलता रहे इसके लिए गीता उत्सव को मनाना जरूरी है। गीता जीवन जीने की कला है। भगवान कृष्ण ने 5153 वर्ष पहले दुनिया को यह संदेश दिया था। यह संदेश दुनिया में व्याप्त सभी तरह की समस्याओं को हल करने वाला अद्भुत ग्रंथ है। भारतीय संस्कृति का आधार वसुदेव कुटुम्बकम की धारणा हैँ और यह संस्कृति हमें अपने महान ग्रंथों से मिली है। राज्यपाल ने कहा कि 21वीं शताब्दी भारत के पुर्नजागरण की शताब्दी है। आज युवा भारत करवट ले रहा है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 17वीं शताब्दी इंगलैंड की, 18वीं फ्रांस की, 19वीं जर्मनी, 20वीं शताब्दी अमेरिका व 21वीं शताब्दी भारत की होगी। भारत में हो रहा बदलाव यह दिखाता है कि आने वाला समय भारत का है। भारत ने दुनिया के सामने योग का विचार रखा। 21 जून को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित कर दिया। आज पूरी दुनिया को इसका लाभ हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने जिस दिव्य संदेश को कुरुक्षेत्र में दिया था वह संदेश इस अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव व गीता जयंती के माध्यम से देश व दुनिया में पहुंचेगा। उन्होंने इस सफल संगोष्ठी के आयोजन के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति को बधाई दी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि 21वीं सदी में जीवन के कुशल प्रबंधन के लिए गीता को जीवन में अनुसरण करना जरूरी है। गीता को जीवन में अपनाकर ही हम देश में आध्यात्मिक व नैतिक जागरण शुरू कर सकते हैं। आज दुनिया के कई बड़े संस्थानों व बड़ी कम्पनियों में वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों को गीता का अध्ययन करवाया जा रहा है। जीवन में सफलता के लिए श्रीमद्भगवद् गीता का अध्ययन जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति हमारी पहचान है और इस संस्कृति की रचना वेद पुराणों से हुई है। गीता को जन-जन तक पहुंचाकर ही नई पीढ़ी को एक नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के स्वर्ण जयंती वर्ष में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है। यह हरियाणा प्रदेश के लोगों के लिए गर्व का विषय है। पहली बार गीता जयंती उत्सव में देश के 574 जिलों के प्रतिनिधि के रूप में 574 लोग अपने प्रदेश की मिट्टी के साथ यहां पहुंचे हैं। देश के अलग-अलग जिलों से आई इस मिट्टी से कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण की विशाल प्रतिमा बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहली बार हो रहा है कि 18000 से अधिक विद्यार्थी गीता श्लोक उच्चारण मे भाग लेंगे व दुनिया के 25 से अधिक देशों में एक साथ गीता के श्लोक  पढ़े जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यह सभी प्रयास गीता को जन-जन तक पहुंचाने व कुरुक्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रदेश के विकास के लिए 50 स्वर्णिम लक्ष्य निर्धारित किए हैं। सरकार ने प्रदेश के लोगों को पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था दी है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कुरुक्षेत्र व सिरसा जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र व हरियाणा सरकार ने कृष्णा सर्किट के तहत कुरुक्षेत्र का विकास करने की योजना बनाई है इसके लिए 100 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से कुरुक्षेत्र में स्थित अमीन, सन्निहित सरोवर सहित कई अन्य स्थलों को विकसित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत् कुरुक्षेत्र में थ्रीडी मल्टीमीडिया शो, थीम पार्क काम्प्लेक्स व कई अन्य कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर दुनिया भर के विद्वानों का कुरुक्षेत्र में पहुंचना हरियाणा के लिए गौरव की बात है।
इस मौके पर बोलते हुए मौलाना कोकब मुजतबा ने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता सम्पूर्ण मानव कल्याण के लिए एक पवित्र किताब है।  इस ग्रंथ का प्रत्येक शब्द मानवता की भलाई के लिए है। इंसानी जीवन की राहे हिदायत इस ग्रन्थ  में है। जीवन में सफलता के लिए इस ग्रंथ से हम जितना चाहे ले सकते हैं पर इसे लेने वालों में कमी है। उन्होंने कहा कि दुनिया में आपसी प्यार प्रेम व भाईचारे के लिए गीता को पढऩा जरूरी है। अगर गीता का उर्दू में अनुवाद किया जाए तो इस ग्रंंथ से करोड़ो लोगों को रोशनी मिलेगी।
अमेरिकन इंस्टिट्यूट आफ वैदिक स्टडीज के संस्थापक डेविड फरालेे, ने कहा कि गीता का संदेश पूरी दुनिया के लिए है।  गीता, वेद व पुराणों मे निहित संदेश मानव कल्याण की भलाई के लिए, आज पूरी दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। भारत आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से दुनिया को एक नई रोशनी दे सकता है। उन्होंने कहा कि भगवद् गीता सम्पूर्ण जीवन प्रबंधन और विश्व बंधुत्व एवं पर्यटन प्रेरणा विषय पर यह अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी एक अनूठा प्रयास है।
अमेरिका से आए भाई सतपाल जी महाराज ने कहा कि गीता हर प्राणी के लिए है। मानव कल्याण के लिए जीवन में खुशहाली व समृद्धि के लिए गीता अध्ययन जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलबर्ट आईंनस्टाइन, राबर्ट ओपन हाईमर, स्टीव जॉब, मार्क जुकरबर्ग जैसे असंख्य लोगों के जीवन को श्रीमद्भगवद् गीता से प्रेरणा मिली है। जीवन मे कर्मयोगी बनने के लिए इसको अपने जीवन में अपनाना जरूरी है।
एकल अभियान का नेतृत्व कर रहे श्याम गुप्ता ने कहा कि जीवन में कर्तव्य निष्ठा व बुराईयों को खत्म करने के लिए गीता का मनन जरूरी है। गीता आपसी भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की भूमि में देश के 574 जिलों से आए प्रतिनिधि गीता के संदेश को देश के हर कोने तक ले जाएंगे। देश के युवा पीढ़ी को नया रास्ता दिखाने के लिए इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
इस मौके पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि दुनिया में जिस तरह का विघटनकारी माहौल है उस माहौल को परास्त करने के लिए श्रीमद्भगवद् गीता को जीवन में अपनाना जरूरी है। उन्होंने दुनिया के अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस चार दिवसीय संगोष्ठी में होने वाले विचार मंथन से निश्चित रूप से जीवन की वर्तमान समस्याओं का हल निकाल सकेंगे।

 

editor1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *