शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में मातृभाषा के प्रयोग के लिए उचित नीतियों का निर्माण करें सरकारें : जिंदल

विसंके, गुरुग्राम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक पवन जिंदल ने कहा कि देश भर में प्राथमिक शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों में मातृभाषा को ही प्राथमिकता देने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को उचित नीतियों का निर्माण करना चाहिए। नागपुर में हुई अखिल भारतीय प्रतिनीति सभा से लौटकर बुधवार को पवन जिंदल गुरुग्राम में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। सिद्धेश्वर स्कूल के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि अभिभावकों को भी अपनी मातृभाषा को ही महत्वपूर्ण मानने की मानसिकता बनानी चाहिए।
प्रांत संघचालक ने बताया कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का यह मत है कि भाषा किसी भी व्यक्ति एवं समाज की पहचान का एक महत्वपूर्ण घटक तथा उसकी संस्कृति की सजीव संवाहिका होती है। देश में प्रचलित विविध भाषाएं व बोलियां हमारी संस्कृति, उदात्त परंपराओं, उत्कृष्ट ज्ञान एवं विपुल साहित्य को अक्षुण्ण बनाए रखने के साथ ही वैचारिक अनसृजन हेतु भी परम आवश्यक हैं। विविध भाषाओं में उपलब्ध लिखित साहित्य की अपेक्षा कई गुना अधिक ज्ञान गीतों, लोकोक्तियों तथा लोक कथाओं आदि की मौखित परंपरा के रूप में होता है।
पवन जिंदल ने प्रतिनिधि सभा के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि आज विविध भारतीय भाषाओं व बोलियों के चलन तथा उपयोग में आ रही कमी, उनके शब्दों का विलोपन तथा विदेशी भाषाओं के शब्दों से प्रतिस्थापन एक गंभीर चुनौती बन कर उभर रहा है। आज अनेक भाषाएं एवं बोलियां विलुप्त हो चुकी हैं और कई अन्य का अस्तित्व संकट में है। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का यह मानना है कि देश की विविध भाषाओं व बोलियों के संरक्षण और संवद्र्धन के लिए सरकारों, अन्य नीति निर्धारकों और स्वैच्छिक संगठनों सहित समस्त समाज को सभी संभव प्रयास करने चाहिएं। सरकार से मांग करते हुए आरएसएस के प्रांत संघचालक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि तकनीकी, आयुर्विज्ञान सहित उच्च शिक्षा के स्तर पर भी सभी संकायों में शिक्षण, पाठ्य  सामग्री तथा परीक्षा का विकल्प भारतीय भाषाओं में भी सुलभ कराए जाएं। राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) एवं संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में भी लेनी प्रारंभ की गई हैं, यह पहल स्वागत योग्य हैं। इसके अलावा भी अन्य प्रवेश व प्रतियोगी परीक्षाएं, जो भारतीय भाषाओं में आयोजित नहीं की जा रही हैं, उनमें भी यह विकल्प सुलभ कराया जाना चाहिए। शासकीय व न्यायिक कार्यों, नियुक्तियों, पदोन्नतियों तथा सभी प्रकार के कार्य में अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता में ना रख कर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना चाहिए। चाइनीज सामान के बहिष्कार के मुद्दे पर पवन जिंदल ने कहा कि संघ को सरकार से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। संघ दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है, इसलिए अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए देश विरोधी सभी कार्यों का विरोध करेगा। चीनी सामान के बहिष्कार से देश को फायदा होता है तो देशवासियों को हर चीनी सामान का बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ अपने विभिन्न सामाजिक दायित्वों का निर्वहन हमेशा करता आया है। अस्पताल, छात्रावास, विद्यालय, ग्राम विकास, जलसिंचन के कार्य चलाए जा रहे हैं। किसानों के मध्य अब और अधिक कार्य करने की योजना है। देश का किसान समृद्ध हो, आर्थिक दृष्टि से संपन्न हो और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध हो, ऐसी संघ की इच्छा है और संघ इस दिशा में भी कार्य को आगे बढ़ा रहा है। पत्रकार वार्ता में प्रांत प्रचार प्रमुख सुनील कुमार, गुरुग्राम विभाग संघ चालक प्रताप सिंह, विभाग सह कार्यवाह हरिश शर्मा, कुलदीप सहित अनेक संघ पदाधिकारी मौजूद रहे। 

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