वर्तमान समय में भी एक कुशल प्रशासक के तौर पर याद किए जाते हैं शिवाजी महाराज

विसंके, सोनीपत। शहर के भगतपूरा क्षेत्र में राष्ट्रीय सेविका समिति द्वारा शिवाजी महाराज का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। समिति की जिला कार्यवाहिका गीता कौशिक ने बताया कि शिवाजी महाराज एक महान देशभक्तधर्मात्माराष्ट्र निर्माता तथा कुशल प्रशासक थे। माँ जीजाबाई के प्रति उनकी श्रद्धा और आज्ञाकारिता उन्हें एक आदर्श पुत्र सिद्ध करती है। शिवाजी का व्यक्तित्व इतना आकर्षक था कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उनसे प्रभावित हो जाता था। साहसशौर्य तथा तीव्र बुद्धी के धनी शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। उन्होने संपूर्ण रूप से हिंदू राज्य की स्थापना की थीजिसकी सीमाएं अटक से लेकर कटक तक रही थी।

शिवाजी की शिक्षा-दीक्षा माता जीजाबाई के संरक्षण में हुई थी। माता जीजाबाई धार्मिक प्रवृति की महिला थीउनकी इस प्रवृत्ति का गहरा प्रभाव शिवाजी पर भी था। शिवाजी की प्रतिभा को निखारने में दादाजी कोंणदेव का भी विशेष योगदान था। उन्होंने शिवाजी को सैनिक एवं प्रशासकीय दोनों प्रकार की शिक्षा दी थी।

सुमन शर्मा ने बताया कि शिवाजी एक कुशल योद्धा थे। उनकी सैन्य प्रतिभा ने औरंगजेब जैसे शक्तिशाली शासक को भी विचलित कर दिया था। शिवाजी की गोरिल्ला रणनीति (छापामार रणनीति) जग प्रसिद्ध है। अफजल खाँ की हत्याशाइस्ता खाँ पर सफल हमला और औरंगजेब जैसे चीते की मांद से भाग आनाउनकी इसी प्रतिभा और विलक्षण बुद्धि का परिचायक है। शिवाजी एक सफल कूटनीतिज्ञ भी थे। इसी विषेशता के बल पर वे अपने शत्रुओं को कभी एक होने नहीं देते थे। औरंगजेब से उनकी मुलाकात आगरा में हुई थी जहाँ उन्हें और उनके पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया था। परन्तु शिवाजी अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर फलों की टोकरियों में छुपकर भाग निकले थे। मुगल-मराठा सम्बन्धों में यह एक प्रभावशाली घटना थी।

उन्होंने बताया कि शिवाजी पर महाराष्ट्र के लोकप्रिय संत रामदास एवं तुकाराम का भी प्रभाव था। संत रामदास शिवाजी के आध्यात्मिक गुरु थेउन्होंने ही शिवाजी को देश-प्रेम और देशोध्दार के लिये प्रेरित किया था।

शिवाजी केवल मराठा राष्ट्र के निर्माता ही नहीं थेअपितु मध्ययुग के सर्वश्रेष्ठ मौलिक प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्ती थे। महाराष्ट्र की विभिन्न जातियों के संघर्ष को समाप्त कर उनको एक सूत्र में बाँधने का श्रेय शिवाजी को ही है। इतिहास में शिवाजी का नामप्रथम हिन्दू राजा एवं रक्षक के रूप में सदैव सभी के मानस पटल पर विद्यमान रहेगा। 

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