लोकहित के लिए सही सूचनाएं पहुंचाना मीडिया का उद्देश्य होना चाहिए : दत्तात्रेय

विसंके, लखनऊ। बृजमंडल के केशव और आधुनिक केशव के कर्म में कोई अंतर नहीं है। धर्म की स्थापना के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए संघे शक्ति कलियुगे अर्थात कलियुग में वह संघ शक्ति के रूप में आए। भारत भूमि से इस विचार को बढ़ाया जाता रहा है।राष्ट्र को संगठित करके उच्च शिखर पर आगे बढ़ाना है। राष्ट्र को मजबूत करके बरगद की तरह हम आगे बढ़े। समाज प्रत्येक युग में संचार के किसी न किसी माध्यम को अपनाता रहा है। लोकहित के लिए सभी युगों में सही सूचनाएं पहुंचाना मीडिया का उद्देश्य होना चाहिए। संवाद और प्रचार अलग-अलग अवधारणाएं हैं। संवाद प्रक्रिया विचार पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मीडिया और प्रचार विभाग विषय पर बोलते हुए व्यक्त किए। वह बुधवार को लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान और प्रेरणा जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान की ओर से आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम के दौरान साइंटिफिक कनवेंशन सेंटर में बतौर विशिष्ट अतिथि के बोल रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि आज पत्रकारिता एक दोराहे पर है।पत्रकारिता मिशन और प्रोफेशन से होते हुए कमीशन की ओर बढ़ रहा है। भारत में सहभागी, सहगामी और समन्वय लोकतंत्र है। पत्रों ने अलग अलग आवश्यकता के हिसाब से अलग उम्र के लिए अलग विशेषांक निकाले जा रहे हैं। मीडिया के दायित्ववान लोगों को स्वतः नियमन लाने का प्रयास करना है। लोकतंत्र में अधिकार के साथ-साथ स्वनियमन का दायित्व भी अंगीकार करना चाहिए। पत्रकारिता के अंदर जनभावना, जन सहभागिता को बढ़ाने की जरूरत है। संवादहीनता के कारण कभी-कभी ठीक तरीके से सत्य बाहर नहीं आ पाता है। मीडिया में जो बोलना है वो बोलना है चाहें प्राण ही क्यों न चला जाएं।
कार्यक्रम में ‘अंत्योदय की ओर’ विषय पर प्रबोधन के दौरान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि यह वर्ष अंत्योदय और एकात्म मानववाद के प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्मशताब्दी वर्ष है। केंद्र और राज्य सरकारें अंत्योदय को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। अंत्योदय अपनी शाश्वतता को हर काल, परिस्थिति में प्रासंगिक बनाए रखेगा। जब इसे आरंभ किया गया तब पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद के बीच जूझ रहा था। अंत्योदय का विचार उस जगह से चलकर यहां तक पहुंचा है। राहत की चेक मिलने वालों के बैंक खाते नहीं थे। खाता खोलवाने के इससे पहले कोई प्रयास क्यों नहीं किए गए। जो प्राचीन है उसे हमें युगानुकूल और देशानुकूल बनाना है। प्रधानमंत्री आवास का धन हम गरीबों के खातों में भेज रहे हैं। इतिहास के बारे में दीनदयाल जी स्पष्ट थे।
उन्होंने आगे कहा कि हमें लोगों को आज़ादी से पहले के दो सौ वर्षों को भी पढ़ना चाहिए। 57 से शुरू हुआ समर आज भी याद करने की जरूरत है। इतिहास से हमें सुखद ओर दुखद पक्ष को जानने के लिए पढ़ाये जाने की जरूरत है। दीनदयाल और लोहिया जो दो वैचारिक ध्रुव हैं। दोनों इस बात को मानते हैं जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और योगेश्वर श्रीकृष्ण के आदर्श को मानने वाले थे। श्रीराम की परंपरा को न मानने वाले इस देश के नहीं हो सकते। इस बार चार करोड़ कावड़ यात्री थे, बिना किसी व्यवधान के सभी शिवभक्तों ने निर्विघ्न अपना संकल्प पूरा किया। बगैर बाजे के कावड़ यात्रा निकलने का मतलब क्या है। यह तो शवयात्रा ही हो सकती है। हमने गाजे बाजे के साथ कावड़ यात्रा शुरू करवाया। अग़र धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटेंगे तो हर स्थान से हटेंगे। अगर सड़क पर नमाज़ हो सकती है तो सड़क पर शोभायात्रा क्यों नहीं निकल सकती।
उन्होंने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि अगर हम संगठित रूप से अपनी हिम्मत का अहसास कराएं तो कोई टकराने की हिम्मत नहीं कर सकता। तिलक ने कहा था कि गणेश महोत्सव हर गांव में मनाया जाएगा। यदुवंशियों ने पुलिस थानों में कृष्ण जन्म तक के आयोजन बन्द कर दिए गए थे। हमने कहा सभी थानों में जन्माष्टमी मनाइए। दीनदयाल जी कहते हैं भारत राम और कृष्ण से पहले से है। भारत के महापुरुषों ने देश को संगठित करने का कार्य किया है। आप हिंदू कह दीजिए तो साम्प्रदायिक हो जाएंगे। नेपाल, फ़िजी, इंडोनेशिया आदि देशों में हिन्दू कहने पर लोग गौरव करते हैं।
आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय अवधारणा है जो कमाएगा वो खिलाएगा। वामपंथी कहते हैं जो कमाएगा वो खाएगा। देश मे 12 लाख साधु संत ऐसे हैं जिनकी चिंता समाज ही करता है। भिक्षा मांगने का मतलब हम अपने अंदर के अंहकार को छोड़ सकें। भारत से प्रेरणा लेकर तमाम देश कार्य कर रहे हैं। हम अपनी चीजे छोड़ते जा रहे हैं। दीनदयाल का अंत्योदय यहीं से शुरू होता है कि गरीबसम्मत चिंतन पैदा हो। हमने सबसे पहला काम किया कि किसानों के कर्ज माफ़ किए। तुष्टिकरण और फिजूलखर्ची बंदकर क़र्ज़ माफ करने वाले हैं। उज्ज्वला योजना से हम लोगों ने गांव की गरीब महिला ने गैस का चूल्हा और बिजली का बल्ब जला होगा यही तो अच्छे दिनों का वायदा है। हमने 4 महीने में 7 लाख बिजली के कनेक्शन दिए हैं यही अंत्योदय है। दीनदयाल के दर्शन को सरकारें साकार करने को प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि दीनदयाल का विचार गांवसम्मत है गरीबसम्मत है और भारतसम्मत होना है। उत्तर प्रदेश का नाम लेकर लोग चौंक जाते थे। हम पूरे सूबे में 7 एम को ध्यान में रखकर उद्योग नीति देने वाले हैं। हमारा नौजवान पलायन नहीं करेगा हम रोजगार देने वाले हैं। सरकार की दृष्टि में अंत्योदय होना चाहिए। राजनीति को समाज के सापेक्ष होनी चाहिए। राजनीति पर लोकशाही का नियंत्रण होना चाहिए। लोकनीति का अंकुश होना चाहिए। प्रतिनिधि लोकशाही जवाबदेह होनी चाहिए। तकनीकी का लाभ लेकर हम शासन को लोकशाही के प्रति जवाबदेह बनाएं। जब किसी राजनीतिक दल का कोई वैचारिक अधिष्ठान नहीं होता वह कभी प्रासंगिक नहीं रह सकते। दीनदयाल जी हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे। अंत्योदय हमेशा प्रासंगिक बना रहेगा। वहीं, केरल में वामपंथी हिंसा और मीडिया की भूमिका’ पर बोलते हुए सुश्री अद्वेता काला, प्रख्यात लेखिका ने कहा कि मैं मूलतः लेखिका हूं पत्रकार नहीं। अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करने वालों ने केरल के सुजित को वीभत्स तरीके से मार दिया। अब तक 14 स्वयंसेवकों की मौत हो चुकी है । राजेश इस हिंसा का तात्कालिक शिकार है। 1969 से हत्याएं शुरू हुईं और आंकड़े 2000 से ही क्यों शुरू हो रहे हैं। वामपंथी विचारधारा के शासन में अधिकतम हत्याएं हुईं हैं पूरी दुनिया इस बात की गवाह है।  संतोष, विमला को घर मे जलाकर मारा गया। मुख्यमंत्री के गांव में संतोष को मारा गया तब उनको याद नहीं आया। केरल की राजनीति लाश को सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ती है। कथित सेकुलर राज्य केरल में पुलिस एसोसिएशन की राजनीति में सहभागिता है।
संगोष्ठी में राजर्षि टण्डन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने ‘जनसंचार में दूरस्थ शिक्षा में मीडिया का योगदान’ पर बोलते हुए कहा कि भारत विद्वता और ज्ञान का अद्भुत आदिस्थल रहा है। देश के 70 सालों में शिक्षा में बदलाव लाने को कई कमीशन बने सबने नैतिक मूल्यों के समावेश करने की बात कही। हमने अपने परंपरागत ज्ञान और वैशिष्ट्य को भूल रहे हैं। आज शिक्षक, शिक्षा और शिक्षार्थी की भूमिका बदल गई है। दूरस्थ शिक्षा 1728 से चल रही है। छात्रों में नैतिक मूल्यों के समावेश को सेकुलरवाद के नाम पर खारिज कर दिया गया। आज के दौर में तकनीकी के द्वारा दूरस्थ शिक्षा नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। विचारों में धर्म की कर्तव्य में साहस का समावेश होना चाहिए। दूरस्थ शिक्षा सभी का सहारा बन सकता है। चार नए ओपन विश्वविद्यालय खोलकर निजी उच्च शिक्षा के जाल को तोड़ा जा सकता है। इस दौरान विश्व संवाद केन्द्र लखनऊ के अध्यक्ष और नागरिक टाइम्स के संपादक नरेंद्र भदौरिया और लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के अध्यक्ष रामनिवास जैन, प्रेरणा जनसंचार एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष जगदीश उपासने, केशव संवाद संचालन समिति के अध्यक्ष अनंजय त्यागी भी मौजूद रहे। अतिथियों का परिचय और स्वागत  जगदीश उपासने और पत्रकारिता संस्थान परिचय कृपाशंकर ने दिया। अतिथियों का आभार रामनिवास जैन जी ने व्यक्त किया।
इन विभूतियों का हुआ अलंकरण :
इस मौके पर पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रहे लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के निदेशक अशोक कुमार सिन्हा और केशव संवाद के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सिंह को उनके सार्वजनिक जीवन में पत्रकारीय योगदान को लेकर सम्मानित किया गया।

दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ करते अतिथिगण

कार्यक्रम के दौरान पुस्तक का विमोचन करते गणमान्य लोग

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