महिलाओं में  होती है सहनशीलता और सेवा भावना: रवि कुमार 

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विश्व संवाद केंद्र -जींद। हिंदू शिक्षा समिति के तत्वावधान में 28 से 30 जुलाई तक उचाना के सनातन धर्म विद्यालय में तीन दिवसीय कन्या भारती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बालिका शिक्षा समिति की प्रदेश संयोजिका डाॅ निर्मल पोपली और सहसंयोजिका मंजु मानव ने की। इस तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन हिंदू शिक्षा समिति के सह संगठन मंत्री रवि जी एवं उपाध्याक्षा राज विज ने माँ सरस्वती जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके किया।

रवि जी  ने कन्या भारती की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए बताया कि कन्या भारती कन्याओं का एक संगठन है है और इस संगठन का उद्देश्य कन्याओं में नेतृत्व, कर्तृत्व और मातृत्व की भावना का विकास करना है। रवि कुमार ने बताया कि नर्स केवल महिला ही होती है पुरूष नहीं। इसका मुख्य कारण यही है कि उसमें सहनशीलता और सेवा भाव होता है। दूसरे सत्र में राष्ट्रीय स्तर के कोच विजय धीमान और उनके दो सहयोगियों के द्वारा कन्याओं को आत्म सुरक्षा के गुर सिखाए गए। रात्रि सत्र में हरियाणा प्रान्त के संगठन मंत्री बाल किशन ने शिविर को संबोधित किया।
इसके बाद 29 जुलाई को विधिवत वंदना के पश्चात सामूहिक चर्चा का सत्र रखा गया। सभी प्रतिभागियों को 10 समूहों में विभाजित करके प्रत्येक समूह को एक-एक विषय चर्चा करने के लिए दिया गया। प्रत्येक समूह ने अपने अपने विषय पर खुलकर चर्चा की और अनेक ऐसे बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। बच्चों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा करने के उपरांत बताया कि हमें बड़ों से मित्रतापूर्व संवाद करना चाहिए। पारिवारिक रिश्ते जीवन की मजबूती का आधार हैं। कोचिंग अर्थात ट्यूशन पढ़ना बिल्कुल अनुचित है। इससे जहाँ तक हो सके बचना चाहिए, मोबाइल का प्रयोग भी आवश्यकता के अनुरूप ही करना चाहिए, प्रगति बनाम पश्चिमीकरण के विषय पर चर्चा करने वाली बहनों ने बताया कि आज आधुनिकीकरण के नाम पर नैतिक मूल्यों का हनन हो रहा है। हमें पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के प्रभाव से बचना चाहिए और भारतीय संस्कृति को अपनाना चाहिए। इस दौरान रवि कुमार, संस्थान के निदेशक आचार्य गणेशानंद और राजीव उप्पल का सानिध्य प्राप्त हुआ। अगले सत्र में राज विज ने बच्चों को घर में पड़ी बेकार वस्तुओं से सजावट का सामान बनाने की कला सिखाई। सभी कन्याओं ने इसमें बढ़चढ़ कर भाग लिया। शिक्षा भारती विद्यालय रामनगर की बालिका शिक्षा प्रमुख रजनी मलिक ने बच्चों को हरियाणा के पांरपरिक व्यंजन-गुलगुले, सुहाली, मट्ठी व मटर बनाने सिखाए। इस दौरान बच्चों के लिए एक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। भ्रमण के दौरान बच्चों को बैंक, डाकघर, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, तहसील, सिविल अस्पताल, गऊशाला, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पुलिस थाना आदि स्थानों पर भेजा गया। वहाँ जाकर उन्होंने विभाग से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की। बच्चों के शारीरिक विकास के उद्देश्य से संध्या समय एक सत्र खेल-कूद का भी रखा गया। उसमें बच्चों ने अनेक प्रकार के खेलों का आनन्द लिया। इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने लोकगीत, भजन, पंजाबी व हरियाणवी देशभक्ति गीतो की मनमोहक प्रस्तुति दी। राजीव उप्पल ने भी एक भजन और एक पंजाबी देशभक्ति गीत सुनाकर सब को भाव विभोर कर दिया। इसी प्रकार प्रान्त की उपाध्यक्षा राज विज ने स्त्री में निहित सात शक्तियों के विषय में बताते हुए कहा कि स्त्री शक्ति का एक अद्भूत भंडार है। उसमें कीर्ति, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा आदि अनेक शक्तियाँ विद्यमान हैं। समापन सत्र में राज विज ने सभी कन्याओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्होंने इस तीन दिवसीय कार्यशाला में जो कुछ भी सीखा है, जो कुछ भी अनुभव किया है उसे अपने अपने विद्यालय में जाकर अवश्य लागू करें और कन्या भारती के संगठन को और अधिक मजबूत बनाए। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में हरियाणा प्रान्त के 24 विद्यालयों से 124 पदाधिकारियों, 22 आचार्यों व 2 अभिभावकों ने भाग लिया।

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