महंत की 12 वर्षों की तपस्या के सम्मान में डूमरखां में चल रहा है सात दिवसीय रूद्र महायज्ञ

डूमरखां खुर्द में चल रहा है सात दिवसीय रूद्र महायज्ञ
काशी से आए वेदपाठी पंडितों के सानिध्य में चल रहा है हवन
नरवाना, विसेके| डूमरखां खुर्द गांव में चल रहे सात दिवसीय रूद्र महायज्ञ में सभी जातीयों के लोग शामिल होकर अपने भाईचारे का परिचय दे रहे हैं। बिल्कुल शांतिपूर्वक तरीके से रूद्र महायज्ञ चल रहा है। यज्ञ के शुभारंभ से पूर्व गांव में सुंदर व भव्य कलश यात्रा भी निकाली गई। कलश यात्रा में गांव की सभी वर्गों की सैंकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। कलश यात्रा का शुभारंभ मंदिर से शुरू हुआ और यह कलश यात्रा गांव की परिक्रमा पूरी करने के बाद मंदिर प्रांगण में ही संपन्न हुई। इस रूद्र महायज्ञ के लिए बनाई गई यज्ञशाला में पांच यज्ञ कुंड बनाए गए हैं। काशी, गंगानगर तथा जयपुर से आए 21 वेदपाठी विद्वान पंडितों द्वारा प्रतिदिन हवन किया जा रहा है। सुबह 9 से 11 बजे तक हवन तथा दोपहर बाद 4 से 6 बजे तक कथा का आयोजन किया जा रहा है। गांव के मंदिर के महंत खड़ेश्री महाराज अर्जुन गिरी के 12 वर्ष की तपस्या पूरी होने के सम्मान में ग्रामीणों द्वारा हवन का आयोजन किया जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाले इस यज्ञ में पूर्णाहुति आगामी 9 जुलाई को दी जाएगी। इस दिन गांव में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। मंदिर के महंत खड़ेश्री महाराज अर्जुन गिरी ने बताया कि गांव की सुख-समृद्धि व मानव जाति की भलाई के लिए वह पिछले 12 वर्षों से खड़ी तपस्या कर रहे हैं। आगामी 9 जुलाई को उनकी तपस्या पूर्ण हो जाएगी। उनकी तपस्या पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्रामीणों द्वारा इस सात दिवसीय हवन व भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हवन के लिए बाहर से वेदपाठी पंडित बुलाए गए हैं। यज्ञशाला में प्रतिदिन वेदपाठी पंडितों द्वारा विधिवत रूप से हवन किया जा रहा है। यज्ञशाला में यज्ञ के लिए पांच कुंडियां स्थापित की गई हैं। डूमरखां खुर्द ही नहीं बल्कि डूमरखां कलां गांव से भी प्रत्येक जाति के लोग मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। हवन व भंडारे को लेकर गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों द्वारा उत्सव के तौर पर हवन का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 9 जुलाई को तपस्या पूरी होने पर हवन में पूर्णाहुति दी जाएगी तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

गाँव के मन्दिर में हवन करते
बहार से वेद पाठी ब्राह्मण

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