मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए किसी जाति पर नहीं कोई प्रतिबंध : महंत

ग्रामीणों ने कहा पूजा-अर्चना को लेकर गांव में नहीं किसी प्रकार का कोई विवाद
महंत खड़ेश्री की 12 वर्ष की तपस्या पूरी होने पर गांव में चल रहा है सात दिवसीय हवन का आयोजन
जींद, विसंव| डूमरखां खुर्द के मंदिर के महंत खेड़ेश्री अर्जुन गिरी महाराज ने कहा कि मंदिर में पूजा-अर्चना को लेकर किसी भी जाति पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है। गांव के सभी जातीयों के लोग गांव में पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि गाँव में हवन में आहुति को लेकर एक जाति विशेष का बहिष्कार करने जैसा कोई मामला नहीं है। हवन में केवल विद्वान पंडितों के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है। हवन से पूर्व गांव में जो कलश यात्रा निकाली गई थी, उस कलश यात्रा में गांव के सभी वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया था। गलतफहमी के कारण यह मामला खड़ा हो गया था लेकिन दोनों गांवों की पंचायतों ने मिलकर इस मामले का पटाक्षेप कर दिया है। खड़ेश्री महाराज ने कहा कि डूमरखां खुर्द सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सभी जाति के लोगों में भाईचारा है। मंदिर में पूजा के लिए सभी जाति-बिरादरी के लोग आते हैं। इतना ही नहीं भंडारे में सभी जाति के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। खड़ेश्री महाराज ने कहा कि वह गांव की सुख-समृद्धि व भाईचारे के लिए यह तप कर रहे हैं। लेकिन गत दिवस यह जो घटनाक्रम हुआ है, उससे वह काफी आहत हैं। इस घटनाक्रम से उनकी आत्मा को काफी चोट पहुंची है। गांव के चंद लोग इस मामले को राजनैतिक रूप देकर गांव की शांति भंग करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि मंदिर में आने वाले किसी भी व्यक्ति से उसकी जाति नहीं पूछी जाती। सभी जाति के लोगों को मन्दिर में पूजा करने का बराबर का अधिकार है| गांव की सरपंच सलोचना का कहना है कि महंत खड़ेश्री महाराज की 12 वर्ष की तपस्या पूरी होने के उपलक्ष्य में ग्रामीणों द्वारा सात दिवसीय हवन व भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इस हवन व भंडारे के लिए गांव के सभी वर्ग के लोगों द्वारा विशेष सहयोग किया जा रहा है। भंडारे में शामिल होने के लिए किसी भी जाति विशेष पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है। सरपंच सलोचना ने बताया कि हवन में एक जाति विशेष पर प्रतिबंध की बात को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, इस तरह का गांव में कोई विवाद नहीं है। हवन में शामिल होने को लेकर दो लोगों के बीच गलतफहमी के कारण मनमुटाव हो गया था लेकिन इसे डूमरखां खुर्द व डूमरखां कलां गांव की पंचायतों ने दोनों पक्षों से बातचीत के माध्यम से निपटा दिया था। दलित जाति के व्यक्ति द्वारा जिस व्यक्ति पर हवन में शामिल नहीं होने का  जो आरोप लगाया था, उक्त व्यक्ति द्वारा शिकायतकर्ता से पंचायत में माफी मांगने के बाद ही यह मामला समाप्त हो गया था। मंगलवार को ही दोनों पक्षों में इसको लेकर समझोता हो गया था। अभी गाँव में किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है| सभी जाति के लोग भंडारे में शामिल होकर अपना सहयोग दे रहे हैं। मंदिर निर्माण का जो कार्य चल रहा है, उस कार्य में हर जाति के लोग शामिल होकर अपना सहयोग दे रहे हैं। सरपंच ने कहा फिर भी जिन लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं उन लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए आरोपी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यदि भविष्य में इस तरह की कोई घटना सामने आती है तो पंचायत द्वारा दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए कदम उठाए जाएंगे। वाल्मीकि समाज के शीशपाल, महेन्द्र, बलिन्द्र आदि ने बताया उनके गांव में जातीय भेदभाव वाली कोई बात नहीं है। गांव के भण्डारे में छतीस बिरादरी का सहयोग है, वह भी प्रतिदिन डेरे में धूप लगाकर पूजा करते हैं तथा भंडारे से प्रसाद ग्रहण करते हैं।

मामले के समाप्त होने की जानकारी देते दलित समाज के लोग

सौहार्दपूर्ण था गांव का माहौल
डूमरखां खुर्द में दलित समाज के लोगों का हवन में शामिल होने का बहिष्कार का मामला मीडिया में आने के बाद विश्व संवाद केंद्र के प्रतिनिधियों ने बुधवार को गांव का दौरा किया। इस दौरान गांव का पूरा माहौल सौहार्दपूर्ण था। सभी जातियों के लोग पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में आ रहे थे। गांव में किसी भी तरह का तनाव का माहौल नजर नहीं आ रहा था। ग्रामीणों द्वारा इस पूरे मामले को राजनैतिक करार
दिया जा रहा था। इस मामले में जानकारी लेने के लिए बाहर से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से गांव के लोग बेवजह तूल नहीं की अपील करते नजर आ रहे थे।
दोपहर बाद मामले ने लिया राजनैतिक रूप
विश्व संवाद केंद्र के प्रतिनिधि इस मामले में जानकारी लेने के लिए डूमरखां खुर्द में सुबह लगभग 9 बजे गांव में पहुंच गए थे और दोपहर करीब 2 बजे तक वह गांव में ही रूके और इस मामले में ग्रामीणों से बातचीत की। दोपहर तक मामला बिल्कुल शांत था और गांव में किसी भी तरह का तनाव नहीं था। गांव के सामान्य व्यक्ति से लेकर सरपंच व ब्लॉक समिति मैंबर द्वारा गणमान्य लोगों के माध्यम से शिकायतकर्ता और आरोपी व्यक्ति के बीच के मनमुटाव को खत्म कर मामले का पटाक्षेप करवा दिया गया था| लेकिन दोपहर बाद जैसे-जैसे दिन ढलता गया तो मामले ने राजनैतिक रूप लेना शुरू कर दिया। मामले में बाहरी लोगों के बढ़ते हस्तक्षेप ने इस मामले को हवा देने का प्रयास किया लेकिन गाँव के दोनों पक्षों के लोगों ने अपनी सुझबुझ से इस मामले को समाप्त कर दिया|
वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने कहा आपसी विवाद को जातीय रंग देना का प्रयास कर रहे हैं कुछ लोग 
डूमरखां खुर्द के वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने नरवाना डीएसपी को शिकायत दे कर कहा के उनके गांव में किसी तरह का जातीय विवाद नहीं है। शिकायतकर्ता डूमरखां कला गॉव से है जबकि जिस व्यक्ति पर आरोप लगे है वह खुर्द गांव से है। शिकायतकर्ता उनके गाँव में हस्तक्षेप कर जानबूझ कर विवाद खड़ा कर रहा है। वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने कहा कि यदि शिकायतकर्ता को किसी से निजी दुश्मनी है तो वो अपने स्तर पर इस पर कार्रवाई करे। इस मामले को जातीय रंग दे कर बिना वजह दोनों गांव में बेकार में विवाद न पैदा करे। उनके गांव में सभी जाति के लोगों का भाईचारा है और सभी जाती के लोग भंडारे में शामिल हैं।

गाँव के मन्दिर में हवन करते
बहार से वेद पाठी ब्राह्मण

editor1

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