भारत को विश्वगुरू बनाना है तो देश को करना होगा संगठित : मेजर करतार सिंह जी

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विश्व संवाद केंद्र ,जींद- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय प्रांत संघचालक मेजर करतार सिंह जी ने कहा कि पांच हजार वर्ष पहले भारत विश्व गुरू था लेकिन भारत ने किसी भी देश पर न तो आक्रमण किया और न ही किसी देश का शोषण किया। समय के साथ-साथ हमारे समाज व संस्कृति में परिवर्तन हुआ और हम जात-पात व क्षेत्रवाद में बंट गए। यदि भारत को दोबारा से विश्व गुरू बनाना है तो सबसे पहले हमें क्षेत्रवाद व जात-पात के दायरे से बाहर निकलकर संगठित होना होगा। मेजर करतार सिंह रविवार को गोपाल विद्या मंदिर में  स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके साथ विभाग कार्यवाह घनश्याम जी भी मौजूद रहे। बैठक के बाद स्वयंसेवकों ने शहर में पथ संचलन भी निकाला। स्वयंसेवकों का पथ संचलन गोपाल स्कूल से होते हुए, देवीलाल चौक, टाऊन हाल, रानी तालाब, सफीदों गेट, रुपये चौक, शिव चौक से होते हुए वापस गोपाल स्कूल पहुंचा। पद संचलन से पूर्व स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजा भी की। पूरा शहर भारत माता के जयघोषों से गुंज उठा। पद संचलन के दौरान पद संचलन के दौरान जगह-जगह स्वयंसेवकों पर पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का जोरदार स्वागत भी किया गया।

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मेजर करतार सिंह ने कहा कि विजयदशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसके बाद से ही इस दिन को अच्छाई पर बुराई की जीत के रूप में मनाया जाता है। देश को संगठित करने के लिए ही परमपुज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने विजयदशमी के अवसर पर ही १९२५ में नागपुर के मोहिते के बाड़े में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन कर शाखा की शुरूआत की। प्रतिदिन शाखा में जाने से स्वयंसेवक में रचनात्मक कार्य करने की ऊर्जा उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि १९३६ तक लंका भारत का ही हिस्सा था लेकिन अंग्रेजों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इसे खंडित कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के अलावा १०२ देशों में हिंदू रहते हैं और ४६ देशों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाएं लगती हैं। विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा इसलिए शुरू की गई क्योंकि जो दुर्जन शक्तियां हैं, उनको शस्त्रों के बिना पराजित करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गणवेश में परिवर्तन जरूर हुआ है लेकिन इसके विचारों व कार्यप्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

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