भारत को पुनर्जीवित करने के लिए लोगों में पैदा करने होंगे संस्कार : राज्यपाल

भारत निर्माण में कलाकार बन सकते हैं शिल्पी : राजनाथ

–धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में हुआ संस्कार भारती के तीन दिवसीय अखिल भारतीय कला साधना कार्यक्रम का रंगारंग आगाज

कुरुक्षेत्र, विसंके। हरियाणा के महामहिम राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि पराधिनता के कारण हम अपने संस्कारों को भूल बैठे हैं। हम देखने में तो भारतीय लगते हैं लेकिन अपने संस्कार, व्यावहार, आचरण से हम वास्तव में भारत से दूर हो गए हैं। भारत को पुनर्जीवित करने के लिए हमें देश के लोगों को संस्कार देने होंगे। महामहिम राज्यपाल शनिवार को संस्कार भारती द्वारा कुरुक्षेत्र के गीता विद्या मंदिर में आयोजित अखिल भारतीय कला साधक संगम कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर देशभर से आए कलाकारों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके साथ केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। शंखध्वनि के आगाज के साथ दीप प्रज्जवलित कर महामहिम राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी व केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पूर्व राज्यपाल तथा केंद्रीय गृहमंत्री ने हरियाणवी प्राचीन कला प्रदर्शनी तथा चित्रकला का अवलोकन भी किया। हरियाणवी प्राचीन कला प्रदर्शनी में हरियाणवी संस्कृति, रहन-सहन, वेषभूषा, प्राचीन पद्धति की छलक साफ तौर पर नजर आ रही थी। वहीं चित्रकला प्रदर्शनी में चित्रकारों द्वारा चित्रों के माध्यम से महाभारत के युद्ध को दर्शाया गया। कार्यक्रम में पहुंचे दर्शकों ने जमकर लुत्फ उठाया तथा नगाड़ों की थाप पर दर्शक जमकर थिरके। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि दर्शकों को एक ही कार्यक्रम के माध्यम से देशभर की संस्कृति की झलक देखने को मिली। राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि कुरुक्षेत्र का भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में विशेष महत्व है। राजनैतिक तौर पर तो दिल्ली हमारी राजधानी है जबकि आर्थित दृष्टि से मुंबई हमारी राजधानी है लेकिन धार्मिक व आध्यात्म के तौर पर देखा जाए तो कुरुक्षेत्र हमारी राजधानी है। उन्होंने संस्कार भारती द्वारा आयोजित कला साधना कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्कार भारती का जन्म 11 जनवरी 1981 को हुआ था और आज यह संस्था पूरे वट वृक्ष का रूप धारण कर देशभर के लोगों में संस्कार उत्पन्न करने का कार्य कर रही है। कुरुक्षेत्र में आयोजित यह कार्यक्रम देश को एक नई दिशा देने का काम करेगा। इस कार्यक्रम में देशभर से आए कलाकार भारत के संस्कारों को साधकर देश को नया जीवन देंगे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में आयोजित प्रदर्शनी के माध्यम से कलाकारों द्वारा हरियाणवी संस्कृति व कला को जीवित करने का कार्य किया गया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुुरुक्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से 4 हजार कलाकार यहां पहुंचे हैं। यह कलाकार एक-दूसरे के साथ संपर्क कर देश की संस्कृति को साधने का कार्य करेंगे। भारतीय नाट्य 2 हजार वर्षों से भी पुराना नृत्य है। इसकी पहचान भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में है। कला में एक ऐसी शक्ति है जो अपने माध्यम से अनकहे को कह देती है तथा अदृश्य को प्रदर्शित कर देती है। कला के माध्यम से समाज में परिवर्तन किया जा सकता है। इसलिए कला के महत्व को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। कलाकारों के लिए तो कला पूरी गीता है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय परंपरा में कला को साधना की मान्यता है। कला के प्रदर्शन से रस की उत्पत्ति होती है। भारत मुनि ने नाटड्ढ शास्त्र में नौ तरह के रस बताए हैं। ये नवरस दिखते नहीं, पर हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में इनका अनुभव करता है। कला के संसार की सबसे बड़ी कृति महाभारत है। हजारों साल बाद भी उसकी प्रासंगिकता समाप्त नहीं हुई।महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि महाभारत में भगवान श्री कृष्ण एक पूर्ण कलाकार थे। वह 16 कलाओं में निपूर्ण थे। उन्होंने कुरुक्षेत्र में जो गीता ज्ञान दिया वह मनुष्य के जीवन के हर पहलू को छूता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में हमनें भले ही कितनी भी तरक्की क्यों न कर ली हो लेकिन कला में विज्ञान से अधिक ताकत होती है। कला रहित मनुष्य पशु के समान होता है। कला देश के प्राणा हैं। संगीत के सात सूरों की विभुति से पत्थरों को भी जीवित किया जा सकता है। गृहमंत्री ने कहा कि 19वीं शताब्दी में देश की आजादी के लिए जो जन जागरण हुआ उसमें समाज सुधारकों के साथ-साथ कला का भी विशेष योगदान है। उस समय के लेखकों ने बड़े ही कलात्मक ढंग से अपनी लेखनी का प्रयोग कर लोगों को जागरूक करने का काम किया था।1905 में गुरदेव रविन्द्र नाथ टैगोर के भतीजे अवनीन्द्र नाथ टैगोर ने एक ऐतिहासिक चित्र बनाया था, जिसे भारत माता के नाम से जाना गया। उस एक चित्र ने पूरे बंगाल में जनमानस को इतना प्रेरित किया कि बहन निवेदिता उस चित्र को पूरे भारत वर्ष में ले जाना चाहती थी। उन्होंने कलाकारों से आह्वान करते हुए कहा कि कला को प्रेरणादायी बनाकर लोगों को प्रेरित करें तथा समाज को नई दिशा देने का काम करें। कला साधक देश के नए शिल्पी बन सकते हैं। राजनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री का भी यह संकल्प है कि वह देश की जनता के सहयोग से 2022 तक देश को आतंकवाद, भ्रष्टाचार तथा गरीबी मुक्त करेंगे। वहीं हरियाणा सांस्कृतिक दर्शन गैलरी के प्रति भी लोगों में भारी उत्साह देखा गया है। गैलरी के अवलोकन के दौरान हरियाणवी चूरमा का स्वाद गृहमंत्री राजनाथ ने भी लिया। उन्होंने कहा कि ऐसा चूरमा उन्होंने कभी नहीं खाया था। इस प्रदर्शनी की सबसे खास बात रही कि दोनों मुख्य मेहमानों राजनाथ सिंह व प्रो- राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को आयोजकों द्वारा रथ का पहिया भेंट किया गया।

गृहमंत्री ने बाबा योगेंद्र को किया सम्मनित
एसएमबी गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय कला साधक संगम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह कार्यक्रम के दौरान मंच से संस्कार भारती के संस्थापक संरक्षक बाबा योगेंद्र को सम्मानित करने पहुंचे। कार्यक्रम के बीच में मंच से बाबा योगेंद्र की भूमिका को अहम बताते हुए सीधे नीचे चले गए। उन्होंने बाबा योगेंद्र को श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

 

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