भारतीय सनातन मूल्य व हिन्दू संस्कृति के जीवंत संवाहक थे अशोक सिंहल

विश्व संवाद केंद्र| उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने अशोक सिंघल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केन्द्रित लेखक महेश भागचन्दका की पुस्तक ‘अशोक सिंघल और हिंदुत्व का सच्चाई का अनुभव’ का विमोचन किया।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि निश्चित रूप से भारतीय सनातन मूल्य व हिन्दू संस्कृति के जीवंत संवाहक अशोक सिंहल पर केन्द्रित यह महाग्रंथ देश की युवा पीढ़ी के साथ-साथ विश्वभर में फैले प्रतिभाशाली भारतवंशी युवाओं के लिए ऊर्जा देने व प्रेरणा देने का कार्य करेगा। जीवन में जितनी प्रतिकूलताएं मिलीं उनसे डटकर मुकाबला कर अशोक सिंहल एक नया रास्ता बनाते रहे और भीड़ में भी प्रामाणिकता के साथ अपनी अलग और विशिष्ट पहचान बनाई। किशोरावस्था में अपने विषय में ने सोचकर अंग्रेजों के अत्याचारों से लड़ने को उद्यत रहकर उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया था। वे आजादी के आन्दोलन से जुड़ने के लिए गांधी की कांग्रेस को नहीं बल्कि डॉ. हेडगेवार के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को वरीयता दी। आज हम एक पवित्र आत्मा का पुण्य स्मरण कर रहे हैं। सार्वकालिक लोकप्रिय संगठनकर्ता अशोक सिंहल कालजयी प्रेरणा पुंज हैं। अशोक सिंहल ने समाज और देश के लिए अपने जो कीमती 75 वर्ष दिए हैं, उस त्याग व तपस्या का फल भारत की भावी पीढ़ियों को जरूर मिलेगा।

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