भगिनी निवेदिता का जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित था : पदमश्री निवेदिता

भारत की स्वतंत्रता की समर्थक थी निवेदिता : कुलपति प्रो. अनायत

विसंके, सोनीपत। भगिनी निवेदिता का मानना था कि मानव सेवा ही भगवान् की सच्ची सेवा है। उनके मन में मानव प्रेम और सेवा इतनी बसी हुई थी कि अपना देश छोड़ वे भारत आ गयी और फिर यहीं की हो कर रह गयी। निवेदिता की इसी सेवा भावना और त्याग के कारण उन्हें भारत में बहुत आदर और सम्मान दिया जाता है और देश में जिन विदेशियों पर गर्व किया जाता है उनमें भगिनी निवेदिता का नाम शायद सबसे पहले आता है।
यह शब्द स्वामी विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष पदमश्री निवेदिता ने मुरथल में स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित भगिनी निवेदिता-भारत के लिए संपूर्ण समर्पण विषय पर आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्यातिथि के तौर पर संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद को याद करने पर सिस्टर निवेदिता का याद आना स्वाभाविक है। वे न केवल स्वामीजी की शिष्या थी, वरन् पूरे भारतवासियों की स्नेहमयी बहन थी। सिस्टर निवेदिता का असली नाम मार्गरेट एलिजाबेथ नोबुल था। 28 अक्टूबर 1867 को आयरलैंड में जन्मी मार्गरेट नोबुल का भारतप्रेम अवर्णनीय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि निवेदिता का मतलब पूर्ण रुप से समर्पण। निवेदिता ने अपने नाम के भांति पूरे जीवन को समाज सेवा में लगा दिया। स्वामी विवेकानन्द की शिष्या भगिनी निवेदिता का जन्म 28 अक्टूबर, 1867 को आयरलैंड में हुआ था। उन्होंने कहा कि वे एक अंग्रेज-आइरिश सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक एवं एक महान शिक्षिका थी। भारत के प्रति अपार श्रद्धा और प्रेम के चलते वे आज भी प्रत्येक भारतवासी के लिए देशभक्ति की महान प्रेरणा का स्रोत है। कुलपति प्रो. अनायत ने कहा कि  भगिनी निवेदिता भारत की स्वतंत्रता की जोरदार समर्थक थी और अरविंदो घोष जैसे राष्ट्रवादियों से उनका घनिष्ठ सम्पर्क था। धीरे-धीरे निवेदिता का ध्यान भारत की स्वाधीनता की ओर गया। भगिनी निवेदिता ने न केवल भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन को वैचारिक समर्थन दिया बल्कि महिला शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि सभी को भगिनी निवेदिता के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, पूरा देश उनके कार्यों से अभिभूत हैं. सभी को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।कि हमारी पुण्य भूमि में तमाम ऐसे लोग हुए है, जिनका जीवन मानवता में लगा रहा। निवेदिता ने अपना सारा जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया। उनके जीवन का एक ही लक्ष्य सेवा भाव रहा है।

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