भगवान बाल्मीकि ने दिया सामाजिक समरसता का सन्देश – प्रताप जी

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विश्व संवाद केंद्र, यमुनानगर –विश्व के सबसे बडे स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 91वें स्थापना दिवस, विजय दशमी एवं सामाजिक समरस्ता का संदेश देते हुए रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जंयती अवसर पर संघ ने विशाल पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया जोकि डीएवी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से प्रारम्भ होकर छोटी लाईन से होते हुए शहीद मेजर नीरज मलिक चौक, भगत सिंह चौक, नगर निगम कार्यालय के सामने सीटी सैंटर से होते हुए गुरू नानक खालसा कॉलेज के सामने से गुजरता हुआ राणा प्रताप पार्क, पुन: शहीद मेजर नीरज मलिक चौक से होते हुए विद्यालय के प्रांगण में सम्पन्न हुआ।
इससे पूर्व संघ के सहप्रांत कार्यवाह श्रीमान प्रताप मलिक  ने कहा कि भगवान वाल्मीकि जी सामाजिक समरस्ता का संदेश देने वाले आदि महर्षि हुए हैं जिन्होंने रामायण की रचना कर पूरे विश्व को पारिवारिक व सामाजिक रिश्तों की मर्यादाओं का महत्व समझाने का अनूठा प्रयास किया। रामायण में जिस तरह से भगवान राम ने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर व संगठित करके अत्याचार और अन्याय के खिलाफ जो युद्ध लड़ा वह आज भी हम सब के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने रामायण में वर्णित  सामाजिक समरस्ता के अनेक बिन्दूओं का वर्णन करते हुए कहा कि वनवास के समय सबरी माता के झूठें  बेर खाना, केवट के साथ संवाद व उसकी नाव में बैठना तथा भगवान श्रीराम की केवट भक्ति के साथ-साथ राम के सेना में वन्य क्षेत्र  में रहने वाले सभी जन जातियों व जीवों का साथ लेना आदि सब यह बताता है कि यह सब विराट हिन्दू समाज की परम्परा व संस्कृति में समाहित है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति उसके स्वयं के परिवार जैसा है। अत: विशाल हिन्दू समाज में किसी भी रूप में भेदभाव या छुआछूत का कोई भी स्थान नहीं है। इन सभी बातों को बाखूबी हमारे ऋषिओं,  संतों महन्तों ने यह स्पष्ट रूप से बताया है जिसका अनुकरण करना हम सबका दायित्व है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति में नर ही नारायण और मानव सेवा ही माधव सेवा है कि अवधारणा युगों-युगों से रही है और यही हमारी विरासत है। जिसके लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने स्थापना काल 1925 से ही कर रहा है।
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इससे पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एमएलएन कॉलेज यमुनानगर के सेवानिवृत गणित प्राध्यापक प्रो. एम.एम. गोयल ने संघ के द्वारा किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा  करते हुए कहा कि आज समाज में यह भरोसेमंद संदेश गया है कि जब तक संघ है तब तक भारत की संस्कृति और सुरक्षा अक्षुण है। उन्होंने समाज का आह्वान किया कि वह हर दृष्टि से संघ कार्य में सहयोग प्रदान करें ताकि सम्पूर्ण समाज संगठित होकर समृद्धि, शक्तिशाली और वैभवशाली बन सके।

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