प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ते किसान

 

 

(लागत कम कर के लाभ बढ़ाने और स्वास्थ्य बचाने के लिए आवश्यक है प्राकृतिक खेती)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से गाँव क्योडक के किसान यशवीर ने प्रयोग के तौर पर एक ऐकड मे बासमती धान की युरिया डि ए पी व फरटीलाईजर के स्प्रे के बिना ओर्गेनिक तरीके से खेती की। जिसके बेहद सुखद और सफल परिणाम आए। फसल की कटाई पर खेत में ही एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें आसपास के गाँव से 55किसानो ने भाग लिया। सभी ने खेत का निरीक्षण किया और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लिया। कार्यशाला में किसानों से प्राकृतिक खेती पर बातचीत के लिए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डा० ओ० पी० चौधरी व संघ की ग्रामविकास गतिविधि के प्रान्त प्रमुख कुलदीप आए। डा० ओ०पी०चौधरी ने किसानो को गो मुत्र व गोबर व प्राकृतिक वस्तुओ से फसलो के लिए खाद व धरती को उपजाऊ बनाने की विधि बताई तथा रसायनों के उपयोग से जमीन और मानव दोनों की सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताया।श्रीमान कुलदीप जी ने किसानो को फसलो की लागत कम करके शुद्ध लाभ बढ़ाने और देश के हित में प्राकृतिक खेती अपनाने के विषय पर बात की। कार्यशाला से प्रभावित किसानों ने अपनी जमीन के कुछ हिस्से पर प्राकृतिक खेती की शुरुआत करने का संकल्प लिया।

Editor4

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