पूर्व सैनिकों को देशहित के लिए संयोजित कर रही है अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद्

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देश सेवा में अपने जीवन का कीमती समय लगाने वाले पूर्व सैनिकों के पूनर्वास व देखभाल के लिए अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद् समाज में तेजी से अपने कदम आगे बढ़ा रही है। सेवा, साहस व सम्मान के ध्येय के साथ यह संगठन निरंतर समाज व राष्ट्र हित के लिए कार्यरत है। इस संगठन की विस्तृत जानकारी पूर्व सैनिकाें व आम जन तक पहुंचाने के लिए संगठन के राष्ट्रीय संगठनमंत्री विजय कुमार के साथ जागरणा पत्रिका ‘म्हारा देश-म्हारी माटी’ के संपादक नरेंद्र कुंडू की विस्तृत बातचीत:-

 

प्रश्न- अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद् का गठन कब हुआ।
उत्तर- परिषद् के गठन की हलचल 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर व उत्तर प्रदेश में शुरू हो गई थी लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसका गठन 1995 में हुआ और इसका नाम रखा गया अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद्।
प्रश्न- परिषद् का मुख्यालय कहां है और हरियाणा में इसका केंद्र कहां है।
उत्तर-परिषद् का मुख्यालय दिल्ली के पटेल नगर में है और हरियाणा प्रांत का केंद्र पंचकूला को बनाया गया है। इसके अलावा जिला स्तर पर भी परिषद् की इकाईयां बनाई गई हैं।
प्रश्न- परिषद् के गठन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर- इस समय देशभर में 32 से 35 लाख पूर्व सैनिक हैं तथा 35 से 40 हजार सैनिक प्रति वर्ष सेवानिवृत्त हो कर आ रहे हैं। इनकी योग्यता, देशभक्ति, अनुशासन और दक्षता को देश की एकता, अखंडता व सुरक्षा जैसे राष्ट्रहित के कार्यों के लिए संयोजित करना तथा पूर्व सैनिकों की देखभाल करना है।
प्रश्न- परिषद् राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने के लिए क्या प्रयास रही है।
उत्तर- सेना की दृष्टि से देश भर केे प्रसिद्ध राष्ट्रीय त्यौहार जैसे 16 दिसंबर को भारत-पाक युद्ध विजय दिवस, 14 अप्रैल को आजाद हिंद फौज दिवस और 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में परिषद् द्वारा मनाया जाता है। नेता जी सुभाष चंद्र बोस का स्म्रण नई पीढ़ी को बना रहे इसके लिए 23 जनवरी को उनकी जयंती पर पूर्व सैनिकाें की सहायता से स्कूलाें व कॉलेजाें में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
प्रश्न- समाजहित में परिषद् का क्या योगदान है।
उत्तर- परिषद् द्वारा पूर्व सैनिकों के माध्यम से उनके गांव में या क्षेत्र में समाज को अच्छा बनाने की दृष्टि से जो कुछ भी प्रयोग किए जा सकते हैं जैसे शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, समरसता व स्वालंबन जैसे सामाजिक उत्थान के लिए अनेकाें काम शुरू किए गए हैं। एक और प्रकल्प राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है कि देश भर में परमवीर चक्र विजेता, महावीर चक्र विजेता व शहीद सैनिकों के जितने भी गांव हैं उन गांवों को परिषद् की ‘वीर सैनिक ग्राम गौरव’ योजना के तहत गोद लेकर उनके विकास के लिए प्रयत्न किए जाते हैं।
प्रश्न- परिषद् के साथ कितने पूर्व सैनिक जुड़े हुए हैं।
उत्तर- अभी तक परिषद् के साथ देशभर से 82 हजार पूर्व सैनिक जुड़ चुके हैं। परिषद् द्वारा एक ही बार में आजीवन सदस्य बनाए जाते हैं। कोई भी पूर्व सैनिक परिषद् का सदस्य बन सकता है। इसके लिए सदस्यता शुल्क मात्र 100 रुपए रखा गया है। यह शुल्क भी सदस्य के गांव में ही रहता है। उस गांव में पूर्व सैनिकों की इकाई का गठन करने के बाद वह इकाई उस सदस्यता शुल्क को अपने गांव के कार्यों में प्रयोग कर सकती है।
प्रश्न- परिषद् द्वारा कितने सदस्यों पर इकाई बनाई जाती है।
उत्तर- परिषद् द्वारा 50 के आस-पास सदस्य होने पर जिला स्तर पर कमेटी का गठन कर दिया जाता है। उसके बाद उसका पंजीकरण करवा कर उनके पास जमा सदस्यता शुल्क से कमेटी का बैंक खाता खुलवा दिया जाता है।
प्रश्न- कितने जिलों में परिषद् का काम शुरू हो चुका है।
उत्तर- देशभर के सभी प्रांताें में परिषद् सक्रिय तौर पर कार्य कर रही है। जिन जिलों में 2500 पूर्व सैनिक हैं, वहां सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों के लिए मैडिकल योजना शुरू की गई है। इन सभी जिलों पर परिषद् की इकाई खड़ी हो इसके लिए प्रयास चल रहे हैं। देशभर में 225 जिलों में परिषद् की इकाई खड़ी हो चुकी हैं।
प्रश्न- परिषद् के साथ यदि कोई पूर्व सैनिक जुड़ना चाहता है तो क्या प्रक्रिया है।
उत्तर- जिला स्तर पर हमारे जिलाध्यक्ष हैं उनसे संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा हमारी वेबसाइट ूूूण्ंइचेेचण्वतह के माध्यम से भी जुड़ा जा सकता है। सदस्यता लेने के लिए सेना का रैंक, नंबर व डिस्चार्ज बुक की फोटो कॉपी देनी होती है।
प्रश्न- पूर्व सैनिकाें के सामने किस तरह की परेशानी आती है और परिषद् उसमें उनकी क्या मदद करती है।
उत्तर- सामान्यतः पूर्व सैनिकों के सामने तीन-चार तरह की परेशानियां आती हैं। इसमें पैंशन संबंधी, मैडिकल संबंधी, कैंटीन संबंधी। इन परेशानियों को दूर करने के लिए परिषद् पूर्व सैनिकाें का सहयोग करती है।
प्रश्न- परिषद् को आर्थिक सहायता कहां से मिलती है। क्या परिषद् किसी राजनीतिक दल से सहयोग लेती है?
उत्तर- परिषद् समाज से ही आर्थिक सहायता लेती है। परिषद् जिस भी क्षेत्र में कार्यक्रम करती है, वहां के लोगों से कार्यक्रम के लिए अनुरोध करती है और सामाजिक लोगों तथा पूर्व सैनिकों की सहायता से ही सभी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। परिषद् किसी राजनीतिक दल से कोई सहयोग नहीं लेती।
प्रश्न- क्या पूर्व सैनिकों के बच्चों की मदद के लिए भी परिषद् कोई प्रयास करती है?
उत्तर- हां पूर्व सैनिकों के बच्चाें की मदद के लिए परिषद् द्वारा भत्ता दिया जाता है। इसमें डिग्री की पढ़ाई करने वाले बच्चों को 7500 रुपए तथा तकनीकी पढ़ाई करने वाले बच्चाें को 12 हजार रुपए का भत्ता दिया जाता है। इस वर्ष परिषद द्वारा पूर्व सैनिकों के 89 बच्चाें को भत्ता दिया गया है। वहीं रोजगार में मदद के लिए भी बच्चाें का मार्गदर्शन किया जाता है। इसके अलावा पूर्व सैनिकों के अनाथ बच्चों के लिए राजस्थान के सीकर में एक छात्रवास की व्यवस्था भी परिषद् द्वारा की गई है। यहां पर रहने वाले बच्चाें के खाने व पढ़ाई की व्यवस्था परिषद् द्वारा की जाती है।
प्रश्न- भत्ते के लिए आवेदन करने की क्या प्रक्रिया रहती है।
उत्तर- भत्ते का फार्म हमारी वेबसाइट पर है, वहां से विद्यार्थी फार्म डाउनलोड कर भर कर जिला के महामंत्री से प्रमाणित करवा कर परिषद् के दिल्ली मुख्यालय भेज दें। यहां से भत्ता राशि विद्यार्थी के खाते में भेज दी जाती है।
प्रश्न- परिषद् की क्या-क्या उपलब्धियां रही हैं।
उत्तर- सन् 2002 में जब भारत-पाक में एक बार पुनः युद्ध की स्थिति हो गई थी उस समय युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों के पार्थिव शरीरों को उनके परिजनों तक पहुंचाने का काम परिषद् ने किया। कारगिल युद्ध के दौरान घायलाें को जम्मू-कश्मीर तथा अन्य चिकित्सालयाें में सहयोग दिया। कारगिल शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहायता तथा सम्मान पत्र प्रदान किए। प्रतिवर्ष योजनाबद्ध यात्रओं द्वारा विविध प्रदेशों के गौरव सेनानियों में राष्ट्रीय एकता का भाव जागृत किया जाता है। पूर्व सैनिकाें की ताकत को समाजहित व देशहित में लगा कर बिना किसी प्रकार की सरकारी मदद की अपेक्षा किए समाज को एक नई दिशा देने का काम परिषद् कर रही है और इसके काफी सकारात्मक परिणाम समाज को मिले हैं।
प्रश्न- पूर्व सैनिकाें के हित के लिए चल रहे अन्य संगठनाें व अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद् में क्या अंतर है।
उत्तर- अन्य संगठन इनके वैल्फेयर के लिए कार्य करते हैं लेकिन परिषद् का ध्येय पहले देश व समाज है इसके बाद पूर्व सैनिकों का वैल्फेयर। पूर्व सैनिक भी तो देश के नागरिक हैं और देश का अपमान वे कभी सहन नहीं करेंगे। केवल अपने लिए जीना तो स्वार्थ की बात है।
प्रश्न- युवाआें के लिए परिषद् क्या करती है।
उत्तर- परिषद् द्वारा युवाओं को सेना की भर्ती का प्रशिक्षण देने के लिए समय-समय पर कैंप लगाए जाते हैं।

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