पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति की पहचान गीता,गाय और गंगा से है : दत्तात्रेय जी

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कुरुक्षेत्र 7 दिसम्बर. गीता मनीषी पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने सभी को गीतामय युवा चेतना कार्यक्रम के सफल आयोजन की बधाई देते हुए श्री गीता जयंती पर्व क्यों मनाया जाता है विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुरूक्षेत्र की भूमि पर 5153 वर्ष पूर्व अर्जुन को कर्तव्यों का एहसास करवाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गीता के उपदेश दिए थे। ये उपदेश किसी एक जाति वर्ग, अर्थ आदि विश्व तक ही सीमित नहीं है, इन उपदेशों का उच्चारण करने से मनोबल, आत्म विश्वास और उर्जा के साथ-साथ जीवन को नई राह भी मिलेगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह माननीय दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि पूरे विश्व में भारत की संस्कृति की पहचान गीता,गाय और गंगा से है। पिछले दो वर्षों में समुचे विश्व में भारतीय संस्कृति का अनुसरण करते हुए योग को अपनाने का काम किया। आज पवित्र ग्रन्थ  गीता के उपदेशों को भी पूरे विश्व के लोग उच्चारण कर अपने जीवन में धारण कर रहे हैं। इन उपदेशों की जन्म स्थली कुरूक्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान गीतामय युवा चेतना जैसे कार्यक्रमों के आयोजन से पूरे विश्व को निश्चित ही प्रेरणा और संस्कार मिलेगें।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने सभी को गीतामय युवा चेतना कार्यक्रम के सफल आयोजन की बधाई देते हुए श्री गीता जयंती पर्व क्यों मनाया जाता है विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुरूक्षेत्र की भूमि पर 5153 वर्ष पूर्व अर्जुन को कर्तव्यों का एहसास करवाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गीता के उपदेश दिए थे। ये उपदेश किसी एक जाति वर्ग, अर्थ आदि विश्व तक ही सीमित नहीं है, इन उपदेशों का उच्चारण करने से मनोबल, आत्म विश्वास और उर्जा के साथ-साथ जीवन को नई राह भी मिलेगी।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गीता स्थली कुरूक्षेत्र की पावन धरा पर अन्तर्राष्ट्रीय गीता जयन्ती महोत्सव के सबसे बड़े गीतामय युवा चेतना कार्यक्रम ने विश्व रिकार्ड बनाने की तरफ कदम बढ़ाया है। इस पावन धरा पर पहली बार 18 हजार विद्यार्थियों ने पवित्र ग्रंथ गीता के 18 अध्यायों के 18 श्लोकों का सामूहिक उच्चारण और अनुवाद कर एक नया इतिहास रचने का काम किया है। इन विद्यार्थियों ने पूरे समाज को कर्म,ज्ञान, भक्ति योग के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है। इतना ही नहीं इस पावन धरा पर पूरे विश्व को एकता और अखंडता का संदेश देने के लिए 574 जिलों की माटी से बनी भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

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