पाकिस्तान पहले आतंकवाद बंद करे तभी बात संभव – लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन

dsc_0884विश्व संवाद केंद्र , इंदौर . डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के तत्वाधान में जाग्रत समाज – सुरक्षित राष्ट्र विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन रविवार को आनंद मोहन माथुर सभागृह, विजय नगर इंदौर में किया गया. व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन जी (सेवानिवृत्त) उपस्थित रहे. भारतीय सेना के जांबाज योद्धा, विचारक सैयद हसनैन जी ने 40 वर्ष के सैनिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभायीं. उन्होंने कहा कि –

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा के अविभाज्य अंग के रूप में समग्र सुरक्षा देखने की आवश्यकता है.
  2. हम पारम्परिक युद्ध नहीं, बल्कि मिश्रित युद्ध का सामना कर रहे हैं. हमें सीमा पर एवं अंदरूनी हिस्सों में सर्वत्र सशक्त रहना होगा.
  3. राष्ट्रीय सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता होनीचाहिए, वर्तमान मेंआम जनता में भी सैन्य रणनीतिक मुद्दों में विशेष रूचि दिखाई  देती है.
  4. भारत कीपूर्व केंद्रित (एक्ट ईस्ट पॉलिसी) आकारले रही है. परन्तु डोनाल्ड ट्रम्प काल में भारत अमेरिकी सम्बन्ध अधिक विशिष्टतावादी है.
  5. योजनापूर्वक सर्जिकल स्ट्राइक्स के पीछे उद्देश्य कभी भी मात्र युद्ध की रोकथाम नहीं रहा, इसका उद्देश्य मात्र अपनी सैन्य रणनीति, दृढ़ निश्चय एवं क्षमता को रेखांकित करना था.
  6. निकट भविष्य में पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती, यदि द्विपक्षीय वार्ता प्रारंभ करना हो तो न्यूनतम एक वर्ष पाकिस्तानकी ओर से समस्त नकारात्मक गतिविधियों का बंद होना आवश्यक है.
  7. हमारे समाज को अपने सैनिकों का उत्तरदायित्व स्वीकार करना होगा. भारतीय लोगों में सेना व सैनिकों के प्रति बहुत स्नेहभाव है, परन्तु इसी के साथ-साथ सैनिकों की विभिन्न समस्याओंको समझने की भी आवश्यकता है.

कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता की वंदना से हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता पू. स्वामी प्रबुद्धानंद जी सरस्वती (चिन्मय मिशन) ने की. उन्होंने कहा कि मेरे मन में हमेशा प्रश्न रहता है कि सेना कर्तव्य कर रही है या सेवा. मुझे लगता है कि कर्तव्य वह है जो करना पड़ेगा. सेना इसलिए ज्वाइन करते है ताकि देश की सेवा बेहतर रूप से कर सकें. संतों को, समाज को कुछ देना होता है, कर्म योग केवल ईश्वर की सेवा नहीं, अपितु अपने ऊंचे लक्ष्य के लिए वह अपना सब कुछ त्याग दे, वही कर्म है. हनुमान जी से अच्छा कर्म योगी नहीं है. सेवा में कभी स्वार्थ एवं व्यक्तिगत अपेक्षा न रहे, देश के हर व्यक्ति को देश की खुशी में खुश रहना, यही देश  सेवा है.

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