धर्म और संस्कृति को सुदृढ़ करने की इच्छाशक्ति से हम अखंड भारत के स्वप्न को कर सकते हैं साकार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अखंड भारत विषय पर किया कार्यक्रमों का आयोजन

विसंके| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा अखंड भारत विषय पर पूरे प्रांत में जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। डबवाली के एक निजी विद्यालय में आयोजित अखंड भारत कार्यक्रम में लगभग 65 परिवारों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिरसा जिला के जिला संघचालक सुरेंद्र मल्होत्रा ने की।
अखंड भारत दिवस मनाने के औचित्य पर बोलते हुए जिला कार्यवाह राजीव ने इतिहास की प्रमुख पहलुओं तथ्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैदिक भारत की सीमाओं का वर्णन करते हुए बताया कि आदि काल में भारत राष्ट्र की सीमाएं बहुत विस्तृत थी ब्रह्मदेश मलेशिया और इंडोनेशिया जिसे प्राचीन काल में हिदोशिया कहां जाता था, भारत राष्ट्र के अंग थे। इतना ही नहीं कंबोडिया थाईलैंड वियतनाम भारतीय संस्कृति के साथ प्राचीन काल से जुड़े हुए थे। पश्चिम में ईरान, इराक तक भारतीय सभ्यता संस्कृति फैली हुई थी। परंतु परिस्थितियोंवंश कुछ सालों पहले कुछ भाग भारत राष्ट्र से अलग हुए और पिछले 114 वर्षों में भारत देश का क्षेत्रफल 8000000 वर्ग मील से घटकर 3200000 वर्ग मील तक आ गया। इतना ही नहीं अफगानिस्तान, तिब्बत और अब का पाकिस्तान और बंगलादेश कुछ दशक पहले हमारे राष्ट्र और संस्कृति के अंग थे। अपने धर्म और संस्कृति के प्रति निष्ठा व इसे सुदृढ़ करने की इच्छाशक्ति से हम अखंड भारत के स्वप्न को साकार कर सकते हैं। यदि यहूदी समुदाय के लोग 1800 वर्षों के संघर्ष के बाद अपना इजराइल देश प्राप्त कर सकते हैं और पश्चिमी जर्मनी और पूर्वी जर्मनी का दशकाें की लड़ाई के बाद इकट्ठे हो सकते हैं तो अखंड भारत की इच्छा वह कल्पना रहने वाले भारत देशवासी अपने सामर्थ्य से अपने लक्ष्य में सफल हो सकते हैं और इसकी आशा रखते हैं।
वहीं गुरुग्राम के द्रोणाचार्य नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाविद्यालयीन कार्य विभाग द्वारा अखंड भारत संकल्प दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 80 युवा स्वयंसेवकों ने भाग लिया। सुभाषित व अमृतवचन के पश्चात मुख्य वक्ता के नाते गुरूग्राम विभाग के विभाग कार्यवाह व इतिहास के व्याख्याता श्याम सुंदर का उद्बोधन रहा। उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन पूर्णतः राजनैतिक था और इसका आधार संस्कृति अथवा संप्रदाय कतई नहीं था। मुट्ठी भर लोगों के निजी स्वार्थों को ध्यान में रख कर लिया गया निर्णय अधिक दिनों तक टिक नहीं सकता और भारत का पुनः अखंड होना अवश्यमभावी है। उन्हाेंने कहा कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान, सिंध एवं पंजाब प्रांत के लोग अपनी प्रांतीय पहचान का ही गौरव करते हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया जाने वाला उनका संघर्ष उनके मन में तीव्र छटपटाहट पैदा कर रहा है। स्वयंसेवकों को आह्वान करते हुए उन्होने कहा कि हम सभी स्वयंसेवकों को इस विषय का अध्ययन करना चाहिए और अपने कॉलेजों में इस पर चर्चा करते रहना चाहिए। इस अवसर पर गुरूग्राम महानगर सह कार्यवाह, महानगर कॉलेज विद्यार्थी कार्य प्रमुख तथा द्रोणाचार्य नगर की समूची नगर टोली उपस्थित रही।

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