तत्कालीन सरकार ने किया नेता जी और अम्बेडकर के योगदान को भुलाने का प्रयास : ब्रिगेडियर

विसंके, हिसार। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राज बहादुर ने कहा कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस का देश को आजादी दिलवाने में तथा डॉ.भीमराव अम्बेडकर का देश के लिए संविधान का निर्माण कर देश को आगे बढ़ाने में अहम योगदान है लेकिन तत्कालीन सरकार ने दोनों के योगदान को भुलाने का प्रयास किया। आजाद हिन्द फौज के लगभग 26 हजार सैनिकों की कुर्बानी को तत्कालीन सरकार ने भूला दिया। ब्रिगेडियर राज बहादुर पूर्व सैनिक सेवा परिषद् द्वारा आजाद हिन्द फौज दिवस व डॉ. अम्बेडकर जयंती के अवसर पर हिसार जिले के बहबलपुर गांव में स्थित सुप्रीम पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके साथ पूर्व सैनिक सेवा परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री विजय कुमार, कार्यक्रम के संयोजक सूबेदार मेजर धर्मबीर सिंह, सह-संयोजक सूबेदार जयसिंह, प्रांत ग्राम विकास समिति प्रमुख कुलदीप सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीआरएसयू के पूर्व कुलपति मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह ने की। कार्यक्रम में लगभग 162 पूर्व सैनिकों व स्वतंत्रता सेनानियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों व पूर्व सैनिकों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
पूर्व सैनिक सेवा परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री विजय कुमार ने कहा कि  14 अप्रैल आजाद हिन्द फौज दिवस के रूप में मनाया जाता है, वहीं 14 अप्रैल को ही डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्मदिवस भी है। डॉ. अम्बेडकर के पिता सेना में सूबेदार के पद पर थे। डॉ. अम्बेडकर ने अपने जीवन में कठोर परिश्रम किया। बीच के कालखण्ड में छूआछूत, जाति-पाति सिर चढक़र बोलने लगी थी लेकिन ऐसी विपरित परिस्थितियों में भी डॉ. अम्बेडकर ने देश हित को प्राथमिकता देकर एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाई। विजय कुमार ने कहा कि देश में लगभग 35 लाख सेवानिवृत्त सैनिक हैं तथा हर वर्ष 35 से 40 हजार सैनिक सेवानिवृत्त होते हैं। पूर्व सैनिकों की इतनी बड़ी शक्ति को प्रोत्साहित कर समाज हित के कार्यों में लगाना ही पूर्व सैनिक सेवा परिषद् का उद्देश्य है। सेना में शामिल होते समय सैनिक जो शपथ लेता है यदि सेवानिवृत्ति के बाद भी वह उस शपथ का अनुसरण करते हुए सरकार से बिना किसी अपेक्षा के समाज हित में कार्य करे तो देश की बहुत सी सामाजिक समस्याओं का समाधान हो जाएगा। पूर्व सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद दहेज प्रथा को खत्म करने, लोगों को शिक्षित करने, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पौधा रोपण इत्यादि समाजिक कार्यों में शामिल होकर देश हित में अपना योगदान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि परिषद् सैनिकों के बच्चों को रोजगार के लिए मार्गदर्शन करने तथा सैनिकों के अनाथ बच्चों को पढ़ाने व भत्ता दिलवाने का कार्य भी करती है। सीआरएसयू के पूर्व कुलपति मेजर जनरल रणजीत सिंह ने कहा कि मॉडर्न शिक्षा के नाम पर देश की प्राचीन संस्कृति को बर्बाद करने का काम किया जा रहा है। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की जरूरत है।

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