चरित्रवान खिलाड़ी तैयार करना क्रीड़ा भारती का उद्देश्य

क्रीड़ा भारती खेलाें के क्षेत्र में काम करने वाला एक सक्रिय संगठन है। यह खेल-खेल में युवाआें का चरित्र निर्माण कर उनमें राष्ट्रीय भाव जागरण करने के लिए प्रयासरत है। इस संगठन की विस्तृत जानकारी समाज तक पहुंचाने के लिए संगठन के हरियाणा प्रांत के महासचिव दीपक जी के साथ हरियाणा की जागरण पत्रिका ‘म्हारा देश-म्हारी माटी’ के संपादक नरेंद्र कुंडू की विस्तृत बातचीत:-
प्रश्न- क्रीड़ा भारती का उद्देश्य क्या है और इसका गठन कब हुआ?
उत्तर- क्रीड़ा भारती का उद्देश्य खेल के  माध्यम से युवाओं के चरित्र का निर्माण करना, युवाआें में देशभक्ति की भावना व संस्कार पैदा कर एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण करना है। क्रीड़ा भारती का गठन 1992 में पुणे (महाराष्ट्र) में हुआ था। लेकिन यह उस समय तक पुणे तक ही सीमित था। खेल जगत के कुछ ऐसे लोग जो चाहते थे कि खेलों के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन हो उन्हाेंने 2009 में इसका विस्तार कर इसे अखिल भारतीय स्वरूप दिया। हरियाणा में क्रीड़ा भारती की गतिविधियां 2013 में शुरु हुई और आज देश के सभी प्रांतों में क्रीड़ा भारती की इकाईयां स्थापित हो चुकी हैं।

प्रश्न- क्रीड़ा भारती के पास आर्थिक फंड की क्या व्यवस्था है?
उत्तर- क्रीड़ा भारती एक सामाजिक लोगों का संगठन है। समाज के साधन-संपन्न व समाज के अन्य लोगाें से संपर्क करके संगठन के लिए आर्थिक व्यवस्था की जाती है। संगठन में कार्य करने वाले सभी लोग सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
प्रश्न- बच्चाें के लिए खेल क्यों जरुरी हैं?
उत्तर- शरीर की मूलभूत आवश्यकता है व्यायाम और खेल। व्यायाम का सशक्त माध्यम खेल हैं। खेलों की जो रचना की गई उसके पीछे का उद्देश्य मानवीय गुणों का विकास करना था। खेलों के माध्यम से तनाव को भी कम किया जा सकता है। इसका एक छोटा सा उदाहरण है यदि आप देश में आत्महत्या करने वाले युवाओं की कोई सूची तैयार करेंगे उसमें आपको सबसे कम या न के बराबर अगर कोई श्रेणी मिलेगी तो वह खिलाडि़यों की मिलेगी। खेल से खिलाड़ी में हार स्वीकार करने की शक्ति पैदा होती है वहीं जीत हासिल होने पर उसमें अहंकार भी नहीं आता। इस प्रकार खिलाड़ी के दिमाग का संतुलन बन जाता है। मैदान पर खेलने से बच्चे में नेतृत्व, सबको साथ लेकर चलने तथा संघर्ष करने की भावना पैदा होती है। आज मोबाइल के आने के कारण बच्चे अपनी खेलों की इच्छा मोबाइल में गेम खेलकर पूरी कर लेते हैं। इसलिए बच्चे कम उम्र में ही तनाव व भिन्न-भिन्न प्रकार की बीमारियाें का शिकार हो जाते हैं।
प्रश्न- क्रीड़ा भारती किस तरह खेलाें के माध्यम से युवाओं में चरित्र का निर्माण कर रही है?
उत्तर- खेलों को लेकर आज हमारे समाज ने यह धारणा बनती जा रही है कि खेलों से हमें नौकरियां मिलेंगी और हमें अन्य सुविधाएं मिलेंगी इसके चलते खिलाडि़याें में कई प्रकार के चरित्रगत दोष पैदा हो रहे हैं। यह खिलाडि़याें का दोष नहीं है। जिस वातावरण में उन्हें खेल खिलाए जा रहे हैं यह उसका दोष है। खिलाड़ी को केवल जीतने के लिए नहीं खेलना है। खेल में खूब आनंद है इसलिए खेलना है। क्रीड़ा भारती खिलाडि़यों को एक स्वच्छ वातावरण देना चाहती है जिससे खिलाड़ी का चहुंमुखी विकास हो, उसमें नैतिक मूल्य विकसित हों। जब खिलाड़ी स्वाभाविक रूप से खेलेगा तो उसे मैडल भी मिलेगा और नौकरी भी। खिलाड़ी पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाना चाहिए उसके अंदर बस खेल की भावना विकसित करनी चाहिए।
प्रश्न- क्रीड़ा भारती खिलाडि़यों को किस तरह के खेल खिलाती है?
उत्तर- खेल सब वही हैं जो ओलंपिक, एशियाड में खेले जाते हैं। क्रीड़ा भारती कोई नए खेल नहीं लेकर आ रही। क्रीड़ा भारती ऐसे लोगाें का चयन करके क्रीड़ा केंद्र चला रही है जहां खिलाडि़यों को खेलों के साथ संस्कार भी दिए जाएं। खिलाडि़याें को केवल देश के लिए खेलना है यह भाव विकसित किए जाएं।
प्रश्न- क्रीड़ा भारती किस तरह के आदर्श खिलाडि़यों के सामने प्रस्तुत कर रही है?
उत्तर- क्रीड़ा भारती का जो स्थापना दिवस है वह हनुमान जयंती है। हनुमान एक आदर्श पुरुष हैं जो खिलाड़ी हनुमान को आदर्श मान कर खेलेगा वह ब्रह्मचार्य का पालन करेगा, नशे से दूर रहेगा, वह चरित्रवान भी बनेगा। वहीं क्रीड़ा भारती द्वारा जो खिलाड़ी मैडल जीत कर आते हैं उनके माता-पिता को ‘जीजाबाई पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाता है। इसके पीछे कारण यह है कि पुरस्कार मिलने से अभिभावकाें के अंदर प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा होगी और वह अपने बच्चों को खेल के लिए प्रेरित करेंगे। इसके अलावा सूर्य नमस्कार एवं विश्व योग दिवस मनाना, क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा आयोजित करना तथा आदर्श खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाना। इस प्रकार क्रीड़ा भारती द्वारा एक आदर्श खिलाड़ी तैयार करने के लिए इस तरह के पांच सूत्रीय कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि खिलाडि़यों का चरित्र निर्माण किया जा सके।
प्रश्न- क्रीड़ा भारती दूसरे संगठनों से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर- खेल के क्षेत्र में काम करने वाली कई एसोसिएशन व फैडरेशन हैं लेकिन क्रीड़ा भारती एक गैर सरकारी संहायता प्राप्त संगठन है। क्रीड़ा भारती की किसी भी संगठन के साथ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है बल्कि यह तो इनकी एक सहयोगी संस्था है जो ऐसे खिलाडि़यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है जो आर्थिक कमजोरी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते हैं। इस तरह के खिलाडि़यों के लिए क्रीड़ा भारती फंड एकत्रित करती है और उन्हें खेलने के लिए सुविधा मुहैया करवाती है।
प्रश्न-युवाओं को खेलों की तरफ आकर्षित करने के लिए क्रीड़ा भारती क्या प्रयास कर रही है?
उत्तर- क्रीड़ा भारती द्वारा स्कूलाें में जाकर क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा आयोजित की जाती है जिससे विद्यार्थियाें में खेलाें के प्रति उत्सुकता पैदा होती है। वहीं जिला स्तर पर क्रीड़ा केंद्र चलाए जा रहे हैं जहां खिलाडि़याें को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। समय-समय पर कई तरह के टूर्नामैंट भी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें कोई भी टीम या खिलाड़ी भाग ले सकता है।
प्रश्न- क्रीड़ा भारती से जुड़ने के लिए क्या प्रावधान है?
उत्तर- क्रीड़ा भारती से कोई भी व्यक्ति सीधे सम्पर्क कर जुड़ सकता है। जिला स्तर पर हमारे कार्यकर्ता हैं, उनसे सम्पर्क किया जा सकता है।
प्रश्न- खेल क्यों जरुरी हैं और खेलों को बढ़ावा देने के लिए क्या प्रयास किए जाने चाहिएं।?
उत्तर- एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खेल जरूरी हैं। स्कूल व कॉलेजों में खेलाें को एक अनिवार्य विषय बनाया जाना चाहिए। खेलों की तरफ युवाआें का रूझान बढ़ने से उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा और चिकित्सा सेवाओं पर जो लंबा बजट खर्च होता है उसमें कमी आएगी। इसके साथ ही अपराध पर भी अंकुश लगेगा। क्याेंकि युवाआें की जो एनर्जी है वह गलत कार्यों में लगने की बजाए खेलाें में लगेगी। विदेशों में तो अपराध को रोकने के लिए खेलाें को माध्यम बनाया गया है। अमेरिका में तो अपराध राेकने के लिए नाइट बास्केट बॉल शुरू किया गया है ताकि जो युवा अपराध की तरफ जा रहा है वह खेलों की तरफ आकर्षित होकर गलत रास्ते को छोड़ दे। खेलाें से युवा अनुशासित होगा व उनमें देशभक्ति की भावना भी पैदा होगी। इससे देश की सेना व पुलिस को भी अनुशासित व सुदृढ़ जवान मिलेंगे। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम एक घंटा खेल जरूर खेलने चाहिएं।
क्रीड़ा भारती से जुड़ने के लिए सम्पर्क सूत्र:-
1- अंबाला विभाग (अंबाला, पंचकूला, जगाधरी, यमुनानगर) दीपक जी महासचिव,
मो- 9416954729
2- कुरुक्षेत्र विभाग (कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत) चेतन जी विभाग संयोजक, मो- 9315509500
3- रोहतक विभाग (रोहतक, सोनीपत, जींद, झज्जर) उमेश जी, प्रांत संगठनमंत्री, मो- 8800996916
4- हिसार विभाग (सिरसा, हिसार, हांसी, फतेहाबाद) जितेंद्र जी अध्यक्ष, मो- 9416570293
5- फरीदाबाद विभाग (फरीदाबाद, गुरुग्राम, नूहं, पलवल) दीप भाटिया जी संरक्षक, मो- 9910160009
6- भिवानी विभाग (भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखीदादरी) श्रीराम जी जिला संयोजक, मो- 9416858458

editor1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *