ग्रामीणों के उत्थान के लिए 60 गांवों से शुरू एकल विद्यालय आज 55 हजार पर पहुंचा 

रांची, विसंके| सुदूरवर्ती वनवासी समाज के उत्थान के लिए वर्ष 1988 में झारखण्ड के धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के 60 गांवों में एकल स्कूल का बीजारोपण हुआ था| वनवासियों में शिक्षा की कमी ने एकल विद्यालय की आवश्कता को महसूस किया था| इसकी स्थापना के पीछे उद्देश्य था -सुदूर गांव में बसने वाले, पहाड़ों, पठारों और वनों में रहने वाले व्यक्तियों को साक्षर और स्वस्थ करना | वर्ष 1988 से 1998 तक एकल स्कूल केवल झारखंड तक ही सीमित रहा, जिसे प्रारम्भ में एक शिक्षक एक विद्यालय एकल विद्यालय एवं ग्राम शिक्षा मंदिर के रूप में तत्कालीन बिहार में विस्तृत किया गया|1998 के आखिर से एकल विद्यालय का स्वरूप झारखंड से बहार निकलने लगा| राष्ट्रीय स्वरूप को देखते हुए ही इसे एकल अभियान कहा जाने लगा |वर्ष 2001 में एकल अभियान भारतीय सीमा लांघकर अंतर्राष्ट्रीय बना| वैश्विक सन्दर्भ में एकल अभियान की एक विशिष्ठ पहचान बनी| इस अभियान में देश-विदेश के लोग जुड़ते गये| वर्तमान में 55 हजार से अधिक एकल विद्यालय चल रहे हैं| वहीँ नेपाल में 2 हजार एकल विद्यालय चल रहे हैं| अभियान के कार्यकर्ता प्रशंसक एवं सहयोगकर्ता भारत के अतिरिक्त अमेरिका, कनाडा, दुबई, हांगकांग, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड आदि देशों में फेले हैं|

क्या है एकल अभियान की पंचमुखी शिक्षा

एकल अभियान के माध्यम से वनवासी उपेक्षित और जरुरतमंदो को साक्षर, समृद्ध, स्वाभिमानी और संस्कारी बनाया जाता है| इसलिए एकल अभियान को पंचमुखी शिक्षा समाहित है| संस्कारित शिक्षा] स्वास्थ्य और विकास की मौलिक सुविधाओ से वंचित वनवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का इस विद्यालय का लक्ष्य है |स्वामी विवेकानंद के इसी सन्देश को पंचमुखी शिक्षा के माध्यम से मूर्त रूप दे रहा है |

झारखण्ड के 5000 गाँवो में संचालित है पंचमुखी शिक्षा 

पंचमुखी शिक्षा की गतिविधियां झारखण्ड के 5000 गांवों में प्रत्यक्ष रूप से चल रही है |जबकि पूरे देश में  55000 गाँवों में उक्त गतिविधियों चल रही हैं|एकल विद्यालय अभियान एक समाज आधरित राष्ट्रव्यापी योजना है, जिसका संचालन समाज के सभी वर्ग के लोग अपनी -अपनी सहभागिता सुनिश्चित करके एक स्वयंसेवक की भांति अपना दायित्व निभाते हैं| अगर संगठन ग्राम संगठन और सेवार्थी कार्यकर्ताओं के माध्म से इसका सफल एवं स्वशासित संचालन होता है|

भाउराव देवरस का कॉन्सेप्ट था एकल विद्यालय :

एकल संस्थान के केन्द्रीय प्रमुख अमेरन्द्र विष्णुपुरी, जो झारखंड देशभर में एकल विद्यालय को निरंतर ऊंचाई पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, उनका कहना है कि इस विद्यालय की स्थपना का श्रय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अधिकारी सह संघ प्रचारक भाउराव देवरस का है |जिन्होंने वनवासी समाज की बेहतरी के मध्यनजर धनबाद जिले के गाँवों में इस विद्यालय को स्थापित करने का कांसेप्ट तैयार किया| इसमें उनका सहयोग कोयला किंग के नाम से ख्यात सह संघ के पदाधिकारी मदन लाल अग्रवाल ने किया | इस विद्यालय को देश-विदेश में ले जाने का श्रय कानपूर निवासी संघ के प्रचारक श्यामजी गुप्त को जाता है जो इस विद्यालय के मार्गदर्शक मंडल में भी हैं|

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