गौरवमय रहा है घुमन्तू, अर्द्ध घुमन्तू व टपरीवास जातियों का इतिहास

फतेहाबाद में आयोजित राज्य स्तरीय 66वें विमुक्त दिवस कार्यक्रम में लोगों में दिखा जोश

विसंके, फतेहाबाद। मुग़ल शासकों से लोहा लेने से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक में डीएनटी के यौद्धाओं का विशेष योगदान रहा है। इन जाति के लोगों द्वारा मुगल शासकों के साथ लड़ाई लड़ने वाले भारतीय यौद्धाओं तथा स्वतन्त्रता संग्राम में शामिल होने वाले क्रांतिकारियों के लिए हथियार तैयार करना, मुखबरी का काम करना सहित अन्य कार्य किए जाते थे। इन लोगों ने कभी भी दुश्मनों के सामने झुकना नहीं सीखा। इन्होने लाख कष्ट सहे लेकिन कभी भी मुगलों को अपनी चोटी और बेटी नहीं दी।हमेशा देशहित के लिए अपना बलिदान देने के लिए यह लोग तत्पर रहते थे। डीएनटी के लोगों ने कभी भी अंग्रेजों का साथ नहीं दिया। इनकी बहादुरी से डरकर अंग्रेजों ने इन लोगों को समाज से तोड़कर अलग करने के लिए एक बड़ी साजिश रची। अंग्रेजों ने 1871 में क्रिमिनल एक्ट बनाकर घुमंतु जातियों को क्रिमिनल घोषित कर दिया था। 21 अगस्त 1952 को सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस एक्ट को डिनोटिफाइड करवाकर इन जातियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने का कार्य किया। इसके बाद से ही विमुक्त दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है। इस वर्ष फतेहाबाद में यह दिवस मनाया गया। हरियाणा की मौजूदा सरकार ने घुमंतु जातियों के युवाओं को कोतवाल में रिपोर्ट करने व रजिस्टर-8 को समाप्त कर वर्ष 2016 में आदतन अपराध अधिनियम को समाप्त कर इस समाज के लोगों के लिए बड़ा तोहफा दिया है। फतेहाबाद में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में घुमन्तू, अद्र्ध घुमन्तू तथा टपरीवास जातियों के लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। लोग पूरे उत्साह व जोश के साथ कार्यक्रम में पहुंच रहे थे।

सजे-धजे ऊंटों के साथ समारोह में पहुंचे समाज के लोग

66वें राज्य स्तरीय विमुक्ति दिवस समारोह में प्रदेश के सभी जिलों से समुदाय की विभिन्न जातियों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कई जिलों से रैबारी जाति के लोग सजे-धजे ऊंटों व गाजे-बाजे के साथ पहुंचे। सोनीपत के मुरथल से अपने ऊंटों के साथ आए 70 वर्षीय भैरो सिंह व 60 वर्षीय भाग सिंह ने बताया कि वे ऊंटों के सहारे ही जीवन-यापन करते हैं और बच्चों के लिए रोजगार के मार्ग खुलने की उम्मीद के साथ यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि रैबारी जाति की जनसंख्या मुख्यत: हरियाणा के 75 से अधिक गांवों में रहती हैं और हर गांव से लोग बड़ी उम्मीदों के साथ सम्मेलन में शामिल होने आए हैं। इन्होंने बताया कि वे दर्जनों की संख्या में अपने ऊंटों के साथ रात को ही यहां पहुंच गए थे। रात को यहां आस-पास के गांवों में अपने रिश्तेदारों के यहां रुके और अब सुबह समारोह में पहुंचे हैं। 40 वर्षीय रामकिशन ने बताया कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते न तो वे खुद पढ़ पाए और न ही अपने बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं लेकिन अब वर्तमान सरकार द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की दिशा में जो प्रयास किए जा रहे हैं, उससे उनमें नई उम्मीद जगी है। ऊंटों व गाजे-बाजे के साथ पहुंचे भिरडाना के सरपंच सुभाष, उनके साथ आए सुभाष, कर्मवीर रैबारी, राजेंद्र रैबारी आदि ने बताया कि कैथल, नरवाना, बहादुरपुर, जींद, राजगढ़ (कुरुक्षेत्र) और रोहतक से उनके रिश्तेदार रात को गांव में ही रुके और आज यहां पहुंचे हैं। पहली बार हो रहे इस प्रकार के सम्मेलन से समाज के लोगों में नई उम्मीदें पैदा हुई हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार के इस प्रयास से समाज की अगली पीढिय़ों के दिन सुधरेंगे। शिव गायन करते पहुंचे जंगम समाज के लोग विमुक्त, घुमंतु, अर्ध-घुमंतु एवं टपरीवास जातियों के लिए आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में जंगम समाज के लोग शिव गुणगान करते हुए पहुंचे। बीन, तुंबा व टाल्ली के साथ गायन करते और अपने सिर पर विशेष प्रकार की मोरपंखी पगड़ी धारण किए जंगम समाज के ये गायक अन्य लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्यमंत्री के आगमन के पश्चात इन्होंने अपने विशेष वाद्य यंत्रों के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल का स्वागत भी अलग ही अंदाज में किया। जंगम समाज के लोगों के साथ समारोह में पहुंचे उत्तर भारत जंगम समाज के महानिदेशक प्रो. रामनिवास ने बताया कि हरियाणा में जंगम समाज के लोगों की सख्या लगभग 12 हजार है। ये लोग पूरे देश में घूमकर भिक्षावृत्ति करते हैं और अपने परिवार का पेट पालते हैं। अब तक कम जनसंख्या के कारण किसी राजनीतिक दल ने इनकी ओर ध्यान नहीं दिया। उपेक्षा के चलते इनकी संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है जिस कारण यूनेस्को ने 2012 में हरियाणा की जंगम परंपरा को लुप्तप्राय: घोषित कर दिया था। इसे बचाने के लिए यूनेस्को ने भारत सरकार को विशेष बजट भी जारी किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी इस बात पर ताज्जुब जताया था कि उन्हें पता ही नहीं कि हरियाणा में जंगम जाति है। वर्तमान मुख्यमंत्री ने ही जंगम जाति को अलग पहचान देते हुए इस वर्ग को पिछड़ा वर्ग सूची में 72वें स्थान पर रखा है। वर्तमान सरकार ही इस वर्ग की दशा में सुधार के लिए इसे अनुसूचित जाति में शामिल करवाएगी, इसकी उम्मीद भी इस वर्ग को है।

 

सम्मेलन की खास बातें

  1. सम्मेलन की खास बात रही की इसमें शामिल लगभग 30 घुमंतु कबिलों के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री के साथ मंच सांझा करने का अवसर मिला, जो मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता का भी परिचायक है।
  2. प्रदेश की मंडियों के मुकाबले फतेहाबाद की नई अनाज मंडी का दोगुने बड़ा शैड भी लोगों से ठसाठस भर गया।
  3. भारी भीड़ के कारण रैली स्थल कम पड़ा तो लोगों ने मंच के दाईं ओर बने दूसरे शैड में लगी स्क्रीन पर वक्ताओं के भाषण सुने।
  4. रैली में महिलाओं की संख्या लोगों के आकलन से कई गुणा ज्यादा रही।
  5. रैली पंडाल बार-बार भारत माता की जय, भाजपा की जय के नारों से गूंजता रहा।
  6. रैली में लोग पूरे उत्साह व जोश के साथ अपनी परंपरागत पौशाकें डालकर पहुंचे।
  7. रैबारी जाति के लोग अपने ऊंटों को सजाकर बड़ी संख्या में फतेहाबाद शहर के मुख्य मार्ग से गुजरे तो सबके आकर्षण का केंद्र बने।
  8. जोगी समाज के लोग जोगी-जंगम गाते आए तो बाजीगर समाज के लोग ढोल व नगाड़े बजाते हुए रैली स्थल तक पहुंचे।
  9. नाथ व सपेरा समाज के लोगों की बीन की धुन को सुनने के लिए लोगों का तांता लगा।
    10 बंजारा जाति के गानों की धुन लोगों को अलग ही आनंदित कर रही थी।
  10. फतेहाबाद के बाजारों में चारों ओर से आई भारी भीड़ की ही मुख्य चर्चा रही।
  11. सम्मेलन में हरियाणा के मशहूर गायक राजू पंजाबी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, हरियाणा की बदलती तस्वीर व देशभक्ति के गानों पर सभी लोगों को झुमने पर मजबूर कर दिया।

editor1

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