कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था है और हमेशा रहेगा : रामबिलास शर्मा

शिक्षा मंत्री ने एसआरएम यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का किया शुभारंभ

विश्व संवाद केंद्र  (सोनीपत)।    हरियाणा के शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क को अपनी हरकतों पर लगाम लगानी होगी, अन्यथा सर्जीकल स्ट्राईक पर विराम नहीं लगा है।
शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा बुधवार को एसआरएम यूनिवर्सिटी में संविधान निर्माताओं की दृष्टि में भारत की संकल्पना विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य अतिथि के रूप में शुभारंभ करते हुए उपस्थित श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे। संविधान निर्माता डा. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र व एसआरएम के संविधान क्लब विधि संकाय के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार का आयोजन किया गया। इस आयोजन के लिए शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि सभी जिला मुख्यालयों में हरियाणा सरकार बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रही है। इसके पहले शिक्षा मंत्री शर्मा ने संविधान निर्माता डा. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें नमन किया।
उन्होंने कहा कि कश्मीर का मुद्दा बेहद गंभीर है। इसके लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है, जिसके पहले भूगोल में परिवर्तन करना जरूरी है। इसके लिए हिंदुस्तान तैयार हो रहा है। कश्मीर समस्या पर विस्तृत चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि- लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई। साथ ही उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को देश की नरेंद्र मोदी सरकार किसी भी सूरत में फांसी नहीं होने देगी। यदि पाकिस्तान से कोई चूक हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में भारतीय सैनिक मथुरा के हेमराज का सिर काटा गया था, जिसकी लाश का अंतिम संस्कार करने से हेमराज के परिजनों ने मना कर दिया था। तब वे अन्य नेताओं के साथ हेमराज के परिजनों से मिलने गए थे और उनकी माता को भरोसा दिलाया था कि उनकी सरकार आने पर ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद भारतीय सैनिकों का सिट कटना बंद हो गया है। प्रो. रामबिलास शर्मा ने इतिहास के किस्सों को सुनाते हुए कहा कि भाजपा के लिए देश ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी वर्तमान में ही जीना चाहती है किंतु उन्हें अपने गौरवमयी इतिहास को अवश्य जानना चाहिए। साथ ही उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति को आत्मसात् करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा-संस्कार-संस्कृति तो भारत के पेटेंट हैं। इनके बल पर भारत अपने अस्तित्व को सदैव बनाये रखेगा। इस मौके पर एसआरएम के कुलपति डा. एस राजाराजन, जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर, एसआरएम के विधि संकाय के डीन डा. अशोक के. कांटरू, जवाहरलाल कौल, प्रो. केएल भाटिया, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट दिलिप कुमार दूबे व आरके राईजादा आदि गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

कार्यक्रम में मोजूद शिक्षा मंत्री

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