एसडी पीजी कॉलेज में “राष्ट्रीय युवा दिवस” के उपलक्ष्य में विवेकानंद साहित्य और युवा संगोष्ठी का आयोजन

विश्व संवाद केंद्र , पानीपत . एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रूप में मनाया गया जिसका थीम “विवेकानंद साहित्य और युवा” रहा. कार्यक्रम का आयोजन हरियाणा  साहित्य अकादमी के सौजन्य से हुआ. संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री अलका गौरी जोशी, हरियाणा-पंजाब प्रान्त संगठक विवेकानंद केंद्र पंचकुला और मुख्य वक्ता के रूप में रेवाड़ी प्रान्त सम्पर्कसूत्र एवं विवेकानंद कार्यकर्ता श्री रणदीप सिंह ने शिरकत कि.
मुख्य वक्ता श्रीमति अलका गौरी जोशी, हरियाणा पंजाब प्रान्त संगठक विवेकानंद केंद्र पंचकुला ने इस अवसर पर कहा की क्लासरूम शिक्षा का हमारे जीवन में कोई औचित्य नहीं है जब तक हम संस्कारो से खुद को युक्त ना करे. हमें अपने अंदर व्याप्त ‘अहं’ को काबू में रखना होगा. कामनाओं और इच्छाओं को काबू में रख कर ही हम सही निर्णय ले सकते है. लक्ष्य जीवन में बहुत जरूरी है परन्तु उन लक्ष्यों को पाने का तरीका भी ठीक होना चाहिए. हमारे मन में महिलाओं के प्रति श्रद्धा तथा सुविचार होने चाहिए. स्वामी विवेकानंद के विचारों में जीवन जीने की कला और शक्ति व्याप्त है । बाहरी दुनिया से भी बड़ी एक दुनिया हमारे अंदर ही है और यह है हमारी चेतना. जब हमें किसी समस्या का हल कहीं नहीं मिलता तब समाधान हमारे अंदर से ही आता है . स्वामी जी को पढ़ने से यही शक्ति और आत्मविश्वास हमारे भीतर पैदा होता है. स्वामी विवेकानंद से बड़ा पथ प्रदर्शक कोई नहीं है.  इस अवसर पर सुश्री अलका गौरी जोशी ने युवाओं से बेहतर साहित्य पढने कि भी अपील कि और उनसे  तरक्की और आध्यात्म में सामंजस्य स्थापित करने का आह्वान किया.
श्री रणदीप सिंह ने कहा कि  स्वामी विवेकानंद को जानने और समझने के लिए मानव भाव और मानवीय गुण होने नितांत आवश्यक है. बच्चे माता-पिता का विस्तार है और जो बच्चे इन संस्कारो और विस्तार के पावन भाव से वंचित रहते है वही गलत रास्ते पर चल पड़ते है. जिनका चिंतन शून्य है जो घर में ही अपनी माँ-बहन का सम्मान नहीं करते वही लोग समाज में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में लिप्त पाए जाते है. जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में महिलाओं का सम्मान किया है उसने हमेशा उंचाइयो को छुआ है. शिवाजी महाराज  और स्वामी विवेकानंद इसी व्यक्तित्व के धनी  थे. उन्होनें कहा कि चरित्र से बड़ा कोई गुण नहीं है. चरित्रवान व्यक्ति जीवन में सबसे आगे रहता है. हमें अपने व्यवहार के प्रति भी सैदव सचेत रहना चाहिए.  उन्होने कहा कि युवाओं के लिए रोमांस का अर्थ बहुत संकुचित हो चला है जबकि यदि हम जीवन, प्रकृति, अपने कार्य, ईश्वर आदि सभी के साथ इसी रोमांस का अनुभव करेंगे तो जीवन में शान्ति और सफलता खुद ही हमारे कदम चूमेंगी.
इस अवसर पर कॉलेज के स्टाफ सदस्य डॉ आरपी सैनी, डॉ सुरेन्द्र कुमार वर्मा, डॉ राकेश गर्ग, प्रो यशोदा अग्रवाल, प्रो इंदु पुनिया, प्रो मयंक अरोड़ा, श्री दीपक मित्तल आदि भी मौजूद रहे.

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