एक अच्छे पत्रकार को होना चाहिए हर विषय का ज्ञान : विजय कुमार

 प्रशिक्षु पत्रकारों को राष्ट्र व धर्म विषय पर भी बारिकी से दी जानकारी

विसंके, कुरुक्षेत्र। एक अच्छा पत्रकार बनने के लिए व्यक्ति को हर विषय का ज्ञान होना चाहिए और ज्ञान गहन अध्ययन से ही प्राप्त होगा। इसलिए मीडिया के क्षेत्र में जाने वाले विद्यार्थियों को अध्ययन की तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए। यह शब्द पांचजन्य व आर्गेनाइजर के निदेशक विजय कुमार ने कहे। वे कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय व विश्व संवाद केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय पत्रकार प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। विजय कुमार ने प्रशिक्षुओं को राष्ट्र व धर्म विषय पर भी बारिकी से जानकारी दी।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को धर्म व रीलिजन का अंतर बताते हुए कहा कि पूजा करने की पद्धति रीलिजन है जबकि मानवता के लिए कार्य करना व सच्चाई के रास्ते पर चलना धर्म है। लेकिन कुछ लोग पूजा करने की पद्धति को धर्म के साथ जोड़ कर समाज में भ्रम फैलाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सभी देशों की संस्कृति से श्रेष्ठ है। अंग्रेजों ने हमारी संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया। सबसे ज्यादा नुकसान लार्ड मैकाले ने भारत की शिक्षा पद्धति को नष्ट कर के किया है। उन्होंने भारत की प्राचीन संस्कृति का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत की काल गणना को 2 अरब वर्ष, युगबद्ध 5119 और विक्रमी संवत् को 2074 वर्ष हो चुके हैं।  जबकि ई. संवत् को अभी तक 2018 वर्ष ही हुए हैं। गैलीलियों से एक हजार वर्ष पहले ही आर्य भट्ट ने यह बता दिया था कि सूर्य स्थिर है।  उन्होंने ‘भारत एक राष्ट्र है’ विषय पर बारिकी से जानकारी देते हुए बताया कि राज्य व राष्ट्र का संबन्ध पानी व मछली जैसा है। राष्ट्र एक जीवमान ईकाई है, यह स्थायी सत्य है। जबकि राज्य अस्थाई भी हो सकता है। राष्ट्र एक सांस्कृतिक अवधारणा है जबकि राज्य एक राजनीतिक अवधारणा है। राष्ट्र बनाने की तीन शर्ते हैं भूमि, भूमि के प्रति लोगों की भावना तथा समान संस्कृति। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए राज्य पैदा होता है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि राज्य महत्वहीन है। भारत से बाहर के लोगों ने भ्रामक शब्दावली का प्रयोग किया और तत्कालीन कांग्रेस के नेताओं ने भी इस भ्रामक धारणा को स्वीकार किया कि भारत एक राष्ट्र बन रहा है। जबकि भारत पूर्ण रूप से एक राष्ट्र है और हजारों वर्ष पहले लिखे गए विष्णुपुराण में भी यह सिद्ध हो जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम ने उत्तर से दक्षिण, भगवान श्रीकृष्ण ने पश्चिम से पूर्व तथा भगवान शिव ने 52 शक्ति पीठ की स्थापना कर पूरे भारत को जोड़ा। आज भारत को भारत के चश्में से देखे जाने की जरुरत है। अब तो विदेशियों ने भी यह मान लिया है कि भारत एक प्राचीन राष्ट्र है। इस अवसर पर उनके साथ डॉ. मधुदीप सिंह, डॉ. बंसी भी मौजूद रहे।  

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