आज के परिवेश में राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए सार्थक है गुरु गोविंद सिंह जी का विचार और व्यवहार

गुरु गोविंद सिंह जी के 351वें जन्मदिन पर पानीपत स्थित गुरुद्वारा नीलधारी साहिब में किया गया भव्य कार्यक्रम का आयोजन

पानीपत, विसंके। ”देह शिवा बर मोहे ईहे, शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं, निश्चय कर अपनी जीत करौं, अरु सिख हों आपने ही मन कौ इह लालच हउ गुन तउ उचरों, जब आव की अउध निदान बनै अति ही रन मै तब जूझ मरों”
गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा रचित उक्त पंक्तियाँ उनकी राष्ट्रभक्ति की परिचायक तो हैं ही साथ ही प्रेरणा का स्त्रोत भी हैं। यह शब्द भाजपा के संगठन महामंत्री सुरेश भट्ट ने कहे। सुरेश भट्ट राष्ट्रीय सिख संगत दवारा गुरु गोविंद सिंह जी के 351वें जन्मदिन पर पानीपत स्थित गुरुद्वारा नीलधारी साहिब में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर सांसद अश्वविनि चोपड़ा, विधायक महिपाल ढांडा, मेंबर माइनॉरिटी सेल बलतेज सिंह, इक़बाल सिंह, हरजीत सिंह मोंगा, नरिंदर पल सिंह, अविनाश जैस्वाल, जसबीर सिंह, कुलदीप सिंह व अमरजीत सिंह कोहली राष्ट्रीय सिख संगत जिला पानीपत की तरफ से उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सिख संगत द्वारा गुरुद्वारा नीलधारी साहिब में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का विचार और व्यवहार दोनो ही राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए आज के परिवेश में सार्थक हैं। जाति, पंथ मत को एक तरफ रख राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना, राष्ट्र रक्षा को सबसे बड़ा धर्म समझना और समाज को सही दिशा दिखाने का कठिन कार्य गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन का दर्शन है। 

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