अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संकल्प दिलवाया माँ, बेटी और बहनों पर अमानवीय कृत्य न करने का संकल्प

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विश्व संवाद केंद्र कुरुक्षेत्र, माननीय श्री इन्द्रेश जी ने अपने वक्तव्य में अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संकल्प करवाया कि कुरूक्षेत्र की इस धर्मभूमि में माँ, बेटी और बहनों पर किसी भी प्रकार का अमानवीय कृत्य न करेंगें और न ही करने देंगें । दैनिक उपयोग की महत्वपूर्ण एवं गूढ़ बताते हुए उन्होंने खेल के माध्यम से देश, धर्म और पर्यावरण की रक्षा का संदेश भी दिया ।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सुन्दर सांस्कृतिक मंचीय रचनाएँ प्रस्तुत की जिन्हें उपस्थित जन समूह ने विशेष रूप से सराहा ।

मुख्य अतिथि कैप्टन अभिमन्यु सिन्धु, वित मंत्री हरियाणा सरकार के कर कमलों द्वारा गीता निकेतन आवासीय विद्यालय के तृतीय विस्तार खण्ड की आधार शिला रखी गई।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अष्टादश श्लोक  गीता के श्लोकचरण  द्वारा वातावरण को गीतामयी बनाकर हुआ ।

अपने वक्तव्य में कैप्टन अभिमन्यु जी ने कहा कि जिस महापुरूष द्वारा इस विद्यालय की नींव रखी गई विद्यार्थी उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग एवं आदर्शों पर प्रतिदिन चिन्तन करते हुए आगे बढ़े  और साथ ही साथ उन्होंने बताया कि आज के सन्दर्भ में केवल अक्षर ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है अपितु विद्यार्थियों को संस्कारक्षम बनाने की बहुत आवश्यकता है ।

साथ ही साथ सभी विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के लिए २१मेधावी छात्रों को छात्रवृति देकर प्रेरित एवं पुरस्कृत किया गया । इस अवसर पर डॉ. पवन सैनी जी, विधायक लाडवा, विद्या भारती हरियाणा के अध्यक्ष        डॉ. श्रीपाल सिंह, अखिल भारतीय मंत्री हेमचन्द्र जी, श्री बालकिशन जी संगठन मंत्री विद्या भारती हरियाणा एवं विद्यालय के अध्यक्ष एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. विश्वराज सिंह, विद्यालय के प्रबन्धक श्री राजेन्द्र कलेर जी, विद्यालय प्रबन्ध समिति की सदस्या डॉ रंजना अग्रवाल  एवं स्थानीय विद्यालय प्रबन्ध समिति के गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का समापन वन्दे मातरम् के साथ हुआ ।

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ऋषि गोयल जी ने इस अवसर पर आए सभी महानुभावों का परिचय दिया और साथ ही साथ सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस नव प्रस्तावित भवन के निर्माण का उदेश्य एक आदर्श विद्यालय की उस परिकल्पना को पूर्ण करना है जिसमें देश के सभी प्रान्तों से आने वाले तथा अप्रवासी भारतीयों के बालकों को भारतीय पद्दति में उच्च स्तर की शिक्षा के साथ संस्कारों की भी शिक्षा प्रदान की जा सके ।

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